भारतकोश
कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : प्रथम खण्ड (लम्बक १ से ५) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1960 (उद्गम)

DevanagariHindipublished876 पृष्ठ

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प्रथम लम्बक ३१ कुछ समय आनन्द का उपभोग करते हुए भी वे ब्राह्मण पुत्रक को मारकर उसका राज्य हड़पने की इच्छा से उसे विन्ध्यवासिनी के दर्शन के बहाने वहाँ ले गये ॥३८॥ वहाँ पर देवी के मन्दिर के भीतरी भाग में वध करनेवालों को रखकर उन्होंने पुत्रक से कहा कि 'पहले तुम अकेले ही देवी के दर्शन करो। भीतर जाओ' ॥३९॥ उनके विश्वास पर मन्दिर के अन्दर प्रवेश करते ही पुत्रक ने प्रहार के लिए उद्यत वधिकों को देखकर पूछा कि 'तुमलोग मुझे क्यों मारते हो ? ॥४०॥ उन्होंने कहा कि तुम्हारे पितरों ने सोना देकर हमें मारने के लिए प्रेरित किया है'। भगवती की कृपा से भ्रष्ट बुद्धिवाले उन वधिकों से पुत्रक ने कहा॥४१॥ मैं तुम्हें अपने बहुमूल्य जवाहिरातों के आभूषण देता हूँ। तुमलोग मुझे छोड़ दो मैं यह बात किसी से न कहूँगा और दूर चला जाता हूँ'॥४२॥ ऐसा कहने पर वधिक लोभ उसे छोड़कर चले गये और उसके पितरों से जाकर झूठ कह दिया कि पुत्रक को मार दिया ॥४३॥ इस प्रकार पाप-कर्म करके राज्य पाने की इच्छावाले ब्राह्मण लौटकर घर गये तो उन्हें राजद्रोही समझकर पुत्रक के मन्त्रियों ने मार डाला। भला ! कृतघ्नों का कल्याण किस प्रकार हो सकता है॥४४॥ इसी बीच राजा पुत्रक भी अपने सम्बन्धियों से विरक्त होकर विन्ध्याचल के गहन वन में चला गया ॥४५॥ वन में घूमते हुए उसने दो असुर-युवकों को बाहुयुद्ध के लिए तैयार खड़े देखा और उनसे पूछा कि 'तुम दोनों कौन हो ? ॥४६॥ वे कहने लगे—'हम दोनों मयासुर के लड़के हैं। हमारे पास यह पैतृक धन है—एक पात्र एक लाठी और दो खड़ाऊँ' ॥४७॥ इस पैतृक धन के लिए हमलोगों का युद्ध हो रहा है 'कि जो बलवान् हो वह इसे प्राप्त करे। उनकी इन बातों को सुनकर पुत्रक ने हँसकर कहा ॥४८॥ 'पुरुष के लिए यह कितना धन है, जिसके लिए तुमलोग युद्ध कर रहे हो। तब वे दोनों बोले—'इस खड़ाऊँ को पहनने से मनुष्य आकाशचारी हो जाता है ॥४९॥ छड़ी से जो कुछ भी लिखा जाता है वह सत्य होता है और इस पात्र में जिस भोजन का ध्यान करें, वही भोजन रखा हुआ मिलता है' ॥५०॥ यह सुनकर पुत्रक ने कहा—'इन वस्तुओं के लिए युद्ध की शर्त उचित नहीं है। दौड़ने में जो अधिक बलवान् हो वही इन्हें ले ले' ॥५१॥ १ इस कथा से मिलती-जुलती कहानी 'अरेबियन नाइट्स' में है, जिसमें शाहजादा मुहम्मद और परीबानू की कहानी में ऐसा प्रसंग आता है कि तीन शहजादे, नूर निहार से शादी करने के लिए ऐसी ही तीन चीजें लाये थे उसका फैसला करने के लिए तीर फेंके गये थे।