कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवक्तव्य
कथासरित्सागर का द्वितीय खण्ड प्रकाशित करते हुए हमें अत्यधिक हर्ष हो रहा है। इसका प्रथम खण्ड १९६ ई के मध्य में प्रकाशित हुआ था। सुधी पाठकों ने इसे अपनाकर हमारा उत्साह बढ़ाया। हमें उसी से प्रेरणा मिली। विश्वास है इस द्वितीय खण्ड का भी उसी तरह स्वागत होगा।
महाकवि सोमदेवभट्ट-विरचित कथासरित्सागर' में कुल १८ लम्बक हैं, जिनमें से प्रथम खण्ड में छह लम्बकों का मूल के साथ हिन्दी-अनुवाद प्रस्तुत किया गया था। द्वितीय खण्ड में पाँच लम्बकों का मूल-सह हिन्दी-अनुवाद प्रस्तुत किया गया है। शेष सात लम्बक तृतीय खण्ड में प्रकाशित किये जायेंगे। इस तरह तीन खण्डों में सम्पूर्ण कथासरित्सागर के प्रकाशन का काम समाप्त होगा। हम उस दिन की प्रतीक्षा कर रहे हैं जिस दिन तृतीय खण्ड का मूल-सह हिन्दी-अनुवाद प्रकाशित कर इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति कर सकेंगे।
कथासरित्सागर के प्रथम खण्ड में हिन्दी के सुप्रसिद्ध विद्वान् डॉ वासुदेवशरण अग्रवाल ने अपनी भूमिका में इस ग्रंथ पर विशद रूप से विवेचन किया है। हम पाठकों से आग्रह करेंगे कि वह भूमिका उसी खण्ड में देखने की कृपा करें। यहाँ उस भूमिका को प्रकाशित करना अनावश्यक था क्योंकि जो भूमिका एक खण्ड में प्रकाशित हो चुकी है वह सभी खण्डों पर समान रूप से प्रकाश डालती है।
जैसा कि हम प्रथम खण्ड के 'वक्तव्य' में निवेदन कर चुके हैं इस ग्रंथ के दो खण्डों का ही हिन्दी-अनुवाद प केदारनाथ शर्मा सारस्वत ने किया था तथा इस ग्रन्थ के लिए उन्होंने विस्तृत भूमिका भी लिखने की योजना बनाई थी तभी उनका देहावसान हो गया और वे इसके प्रथम खण्ड को भी प्रकाशित होते न देख सके। इसके लिए हमें हार्दिक दुःख है। इसके तृतीय खण्ड के शेष सात लम्बकों के हिन्दी-अनुवाद का कार्य सम्पन्न हो रहा है। उसकी पाण्डुलिपि प्राप्त होते ही प्रेस में मुद्रणार्थ भेजी जायगी।
आशा है हमारे सुधी पाठक इस खण्ड को भी उसी चाव से अपनाकर हमें उत्साहित करेंगे।
बिहार-राष्ट्रभाषा-परिषद् भुवनेश्वरनाथ मिश्र 'माधव' दीपावली २ १८ वि संचालक