भारतकोश
कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)

महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा

स्रोत: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (उद्गम)

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२२६ कथासरित्सागर चित्रैश्च तद्विहितैरवरोधसक्तो विमानकैर्विचरन्। अभ्यस्यन्निव भविष्यद्विद्याधरचक्रवर्तिगगनगतिम् ॥२७४॥ इत्यत्र लम्भितसुहृत्स्वजनावरोधो वत्सेश्वरस्य तनयोऽथ स तान्यहानि। रत्नप्रभामदनमञ्चुकयोस्तृतीयां कर्पूरिकां समधिगम्य सुखं निनाय ॥२७५॥ इति महाकविश्रीसोमदेवभट्टविरचिते कथासरित्सागरे रत्नप्रभालम्बके नवमस्तरङ्गः। समाप्तश्चायं रत्नप्रभालम्बकः सप्तमः।