कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८)
महाकवि सोमदेव भट्ट द्वारा
स्रोत: कथासरित्सागर : द्वितीय खण्ड (लम्बक ६ से १८) · बिहार राष्ट्रभाषा परिषद्, पटना · 1961 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंविषयानुक्रमणी [ प्रस्तुत विषयानुक्रमणी हिन्दी अनुवाद के अनुसार है । ] रत्नप्रभा नामक सप्तम लम्बक १-२२७ प्रथम तरंग १-२५ मंगलाचरण ३ रत्नप्रभा की कथा ३ रत्नप्रभा का स्वकथित वृत्तान्त ५ राजा सत्यशील की कथा ७ विक्रमतुंग राजा की कथा ९ । द्वितीय तरंग २५-४३ रत्नप्रभा की कथा २५ राजा रत्नाधिप की कथा २७ श्वेतरश्मि हाथी के पूर्वजन्म की कथा ४१ । तृतीय तरंग ४३-७७ निश्चयदत्त और अनुरागपरा की कथा ४३ बन्दर बने सोमस्वामी की कथा ५७ । चतुर्थ तरंग ७९-९९ राजा विक्रमादित्य और मदनमाला वेश्या की कथा ७९ । पंचम तरंग १ १-१३३ राजपुत्र शृंगभुज और रूपशिखा की कथा १ १ । षष्ठ तरंग १३३-१४९ मरुभूति और गोमुख का पारस्परिक वाक्कल्ह १३३ सिकता-सेतु की कथा १३५ विष्णशर्मा ब्राह्मण की कथा १३७ लवणचक्र वैद्य और राजा अजर की कथा १३९ । सप्तम तरंग १४९-१५९ नरवाहनदत्त की कथा १४९ नागार्जुन की कथा १५१ । अष्टम तरंग १५९-१८९ कर्पूरिका की कथा १५९ इन्दीवरसेन और अनिच्छासेन की कथा १६५ ।