कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)
Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation
महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ख ) वेदोंकी शाखा । अग्नितत्त्व के ज्ञान के लिये वेद में २१ प्रधान विभाग हैं। अतएव ऋग्वेद की २१ शाखायें हैं । जलतत्त्व के प्रधान एकहजार विभाग हैं इसलिये सामवेद की १००० शाखायें हैं । यजुर्वेद में वायु के प्रधान १०१ विभाग हैं । अतएव उतनी ही उसकी शाखायें हैं और मिट्टी के ९ प्रधान विभाग हैं। इसलिये अथर्ववेद की नौ शाखायें हैं। ये सब मिलकर ११३१ शाखायें हैं। साम शब्द का अर्थ है जल, ऋक् का अग्नि, यजुः का अर्थ वायु और अथर्व का अर्थ मिट्टी। प्रत्येक वेद में जल, अग्नि, वायु, और मिट्टी पारिभाषिक शब्द हैं और उनसे हमारे इस जल, अग्नि, वायु, मिट्टी ही का तात्पर्य नहीं है; किन्तु इन चारों पदार्थों के आदि स्वरूप प्रकृति की अन्त्य अवस्था से लेकर स्थूलतम अवस्था तक जितने रूप, प्रकारान्तर से अवान्तर विभाग इत्यादि बनते हैं, उन सब का जातिवाचक नाम जल, अग्नि, वायु और मिट्टी वेद में हैं। जलसे वेद में घृत, मधु, सुरा, जल, इत्यादिक समस्त जलीय पदार्थों से अभिप्राय है। और जल के सूक्ष्म कण जो भाप रूप से आकाश में स्थित हैं, उनको वेद जल ही कहकर पुकारता है। वेद की शाखा का विभाग इस रूप से किया गया है कि एक एक शाखा में हम चार मूल पदार्थों के एक विभाग के गुण, कर्म, स्वभाव इत्यादिकों का विस्तृत वर्णन आ जाय। जैसे सामवेद की १००० शाखाओं में से १००० विभागों में एक एक विभाग का एक एक शाखा में विस्तृत वर्णन मिलेगा। अर्थात् एक जल पर एक शाखा प्रचलित हुई । इसी प्रकार अन्य वेदों की भी शाखायें हैं। प्राचीन ऋषियों ने प्रकृति की अवस्था से अन्त्य अवस्था तक योग बल से पूर्णावलोकन प्रत्येक देश में उस देश की प्राकृतिक रचना को देखकर इन शाखाओं का विस्तृत और क्रमपूर्वक प्रचार किया । उदाहरण स्वरूप उत्तर देश जल- और वायु प्रधान होने से विन्ध्य पर्वत के ऊपर साम और यजुर्वेद का प्रचार हुआ और विन्ध्य से नीचे दक्षिण देश अग्नि और भूमि की प्रधानता होने से वहाँ ऋग्वेद एवं अथर्ववेद का प्रचार हुआ । इससे साफ २ दीखता है कि हमारे ऋषियों ने सृष्टि का कितना सूक्ष्म और विस्तृत अध्ययन किया था। वर्तमान समय में हमारे अभाग्य से वेद की ११३१ शाखाओं में से भारतवर्ष में केवल छः ही उपलब्ध हैं। और ज़र्मन देश में १०३ शाखायें मिलती