भारतकोश
कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

कौशिक गृह्यसूत्रम् (अथर्ववेद शौनक शाखा - संक्षिप्त टीका एवं पं. उदयनारायण सिंह हिन्दी अनुवाद)

Kausika Grihyasutram of Atharvaveda with Hindi Translation

महर्षि कौशिक (अनुवादक: पण्डित उदयनारायण सिंह) द्वारा

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( ३ ) से भलीभांति साफ कर लेना चाहिये-दाम २॥) रु० है। इसमें ५ सूतिका का काम चलेगा और किसी पुरुष के धातु क्षीणता चाहे असाध्य हो, उसका यन्त्र, दवा, तरकीब दाम ५) और थैसिस-जो १ सालके भीतर का हो । यन्त्र, दवा, तरकीब १०) । बाकी रोगों का हाल लिखकर जवाबी टिकट या पोस्टकार्ड भेजना । पत्र लिखते समय रोगी या दुःखी व्यक्ति स्त्री हो या पुरुष उसको उमर, जाति, शरीर का रंग, स्वभाव हो सके तो उसका फोटो एवं पत्र को उसके दहीने ( पुरुष ) या बायें हाथ (यदि स्त्री हो) से स्पर्श करा कर भेजना चाहिये । रोगी किस धर्म को मानने वाला है, मांस खानेवाला है या निरामिष, ईश्वर में उसे विश्वास है या नास्तिक है। इत्यादि बातें लिखनी चाहिये । लिफाफा के भीतर तीन पैसे या डेढ़ आने का टिकट जवाब के लिये -)॥ पैसे का टिकट यों ≡)॥ का टिकट अवश्य भेजना चाहिये । पत्र हिन्दी, संस्कृत या अंग्रेजी में होना चाहिये । एवं अपना पता पूरा देना चाहिये ।

ठाकुर गणेशदत्त सिंह, शास्त्रप्रकाशभवन, मधुरापुर, डाक, बिद्दूपुर बाज़ार । जि. मुज़फ्फरपुर, ( बिहार ) ।