कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० १७ : अ० १ ] जनपदों की स्थापना ७९
(१) आकरकर्मान्तद्रव्यहस्तिवनव्रजवणिक्पथप्रचारान्वारिस्थलपथपण्यपत्तनानि च निवेशयेत् ।
(२) सहोदकमाहार्योदकं वा सेतुं बन्धयेत् । अन्येषां वा बध्नतां भूमिमार्गवृक्षोपकरणानुग्रहं कुर्यात्; पुण्यस्थानारामाणां च सम्भूय सेतुबन्धादपक्रामतः कर्मकरबलीवर्दाः कर्म कुर्युः । व्ययकर्मणि च भागी स्यात् । न चांशं लभेत ।
(३) मत्स्यप्लवहरितपण्यानां सेतुषु राजा स्वाम्यं गच्छेत् । दासाहितकबन्धूननुशृण्वतो राजा विनयं ग्राहयेत् । बालवृद्धव्याधितव्यसन्यनाथांश्च राजा बिभृयात्; स्त्रियमप्रजातां प्रजातायाश्च पुत्रान् ।
राजा उसको बन्द कर दे; क्योंकि कोष के कम हो जाने पर राजा, नगर और जनपद-निवासियो को सताने लगता है । किसी नये कुल को बसाये जाने के लिए प्रतिज्ञात धन राजा को अवश्य देना चाहिए । अथवा राजकोष की आय के अनुसार स्वास्थ्य-सुधार के लिए राजा धन अवश्य खर्च करता रहे । यदि नगर और जनपद-निवासी राजा के द्वारा स्वास्थ्य-सुधार के लिए खर्च किए गए धन को चुका दें, तो पिता के समान राजा उन पर अनुग्रह करे ।
( १ ) राजा को चाहिए कि वह आकर ( खान ) से उत्पन्न सोना-चांदी आदि के विक्रय-स्थान, चंदन आदि उत्तम काष्ठ के बाजार, हाथियों के जंगल, पशुओं की वृद्धि के स्थान, आयात-निर्यात के स्थान, जल-थल के मार्ग और बड़े-बड़े बाजारों या बड़ी-बड़ी मंडियों की भी व्यवस्था कराये ।
( २ ) भूमि की सिंचाई के लिए राजा को चाहिए कि नदियों पर बड़े-बड़े बांध बँधवाये, अथवा वर्षा ऋतु के जल को भी बड़े-बड़े जलाशयों में भरवा दे । यदि प्रजाजन ऐसा कार्य करना चाहते हैं तो राजा को चाहिए कि उन्हें जलाशय के लिए भूमि, नहर के लिए रास्ता और आवश्यकतानुसार लकड़ी आदि सामान देकर उनका उपकार करे । देवालय और बाग-बगीचे आदि के लिए भी राजा, प्रजा की भूमिदान आदि से सहायता करे । गाँव के जो मनुष्य अन्य आवश्यक कार्यों के आ जाने पर उस सहकारी उद्योग में सम्मिलित न हो सकें तो वे अपने स्थान पर नौकर तथा बैल भेज कर सहयोग दें । यदि वे ऐसा भी न कर सकें तो अनुपात के अनुसार उनसे उनके हिस्से का सारा खर्च लिया जाय और कार्य समाप्त होने पर न तो उन्हें उसका साझीदार समझा जाय और न ही उसका लाभ उठाने दिया जाय ।
( ३ ) इस प्रकार के बड़े-बड़े जलाशयों में उत्पन्न होने वाली मछली, प्लव पक्षी ( बतख की भाँति एक जलचर पक्षी ) और कमलदंड आदि व्यापार-योग्य वस्तुओं पर राजा का ही अधिकार रहे । यदि नौकर-चाकर, भाई, पुत्र, आदि अपने मालिक की आज्ञा का उल्लंघन करें तो राजा उन्हें उचित शिक्षा दे । राजा को चाहिए कि