कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० २७ : अ० ११ ] रत्नों की परीक्षा १३३
(१) सामूरं चीनसी सामूली च बाह्लवेयाः । षट्त्रिंशदङ्गुलमञ्जन-वर्णं सामूरम् । चीनसी रक्तकाली पाण्डुकाली वा । सामूली गोधूमवर्णेति । (२) सातिना नलतूला वृत्तपुच्छा औद्राः । सातिना कृष्णा । नलतूला नलतूलवर्णा । कपिला वृत्तपुच्छा च । इति चर्मजातयः । (३) चर्मणां मृदु स्निग्धं बहुलरोग च श्रेष्ठम् । (४) शुद्धं शुद्धरक्तं पक्षरक्तं च आविकम् । खचितं वानचित्रं खण्ड-सङ्घात्यं तन्तुविच्छिन्नं च । (५) कम्बलः केचलकः कलमितिका सौमितिका तुरगास्तरणं वर्णकं तच्छिल्लकं वारवाणः परिस्तोमः समन्तभद्रकं च आविकम् । (६) पिच्छलमार्द्रमिव च सूक्ष्म मृदु च श्रेष्ठम् ।
( तीन हाथ का ) या कदली का तीसरा हिस्सा ( आठ अंगुल ) शाकुला नामक चमड़ा होता है, जिसमें लाल धब्बे और कुछ गांठें पड़ी होती हैं ।
( १ ) हिमालय के बाह्लव नामक प्रदेश में तीन प्रकार का चमड़ा होता है : १०. सामूर, ११. चीनसी और १२. सामूली । सामूर चमड़ा अञ्जन के समान काले रङ्ग का और छत्तीस अंगुल का होता है । चीनसी चमड़ा लाल-काला अथवा पीला-काला रङ्ग का होता है । सामूली गेहुँए रङ्ग का होता है । ये दोनों छबीस-छबीस अंगुल के होते हैं ।
( २ ) उद्र नामक जलचर प्राणी की खाल तीन प्रकार होती है १३. सातिना १४. नलतूला और १५. वृत्तपुच्छा । सातिना काले रङ्ग की होती है । नलतूला, नरसल के समान सफेद होती है । वृतपुच्छा लाल-पीले रङ्ग की होती है । चमड़े की ये पन्द्रह प्रकार की भिन्न-भिन्न जातियाँ हैं ।
( ३ ) मुलायम, चिकना और अधिक बालों वाला चमड़ा उत्तम समझा जाता है ।
( ४ ) भेड़ की ऊन के चमड़े प्रायः सफेद और सफेद-लाल अथवा दूसरे रंग के भी होते हैं । इनके चार भेद हैं : १. खचित ( बेल-बूटेदार ), २. वानचित्र ( बुनाई के समय जिनमें तरह-तरह के फूल चित्रित हों ) ३. खण्डसंघात्य ( तरह-तरह की बुनावट के छोटे-छोटे टुकड़ों के जोड़ ) और ४. तन्तु-विच्छिन्न ( जालीदार कपड़ा ) ।
( ५ ) इनके अतिरिक्त १. कम्बल, २. केचलक, ३. कलमितिका, ४. सौमितिका, ५. तुरगास्तरण, ६. वर्णक, ७. तच्छिल्लक, ८. वारवाण, ९. परिस्तोम और १०. समन्तभद्रक, ये दस भेद बने हुए ऊनी वस्त्रों के और होते हैं ।
( ६ ) चिकना, चमकदार बारीक डोरे का और मुलायम कम्बल उत्तम समझा जाता है ।