भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ३० : अ० १४ ] राजकीय स्वर्णकारों के कर्तव्य १५१

(१) तप्तकलधौतकयोः काकणिकः सुवर्णे क्षयो देयः । तीक्ष्णकाकणी रूप्यद्विगुणो रागप्रक्षेपस्तस्य षड्भागः क्षयः । (२) वर्णहीने माषावरे पूर्वः साहसदण्डः, प्रमाणहीने मध्यमः, तुलाप्रतिमानोपधावुत्तमः, कृतभाण्डोपधौ च । (३) सौवर्णिकेनादृष्टमन्यत्र वा प्रयोगं कारयतो द्वादशपणो दण्डः, कर्तुर्द्विगुणः सापसारश्चेत् । अनपसारः कण्टकशोधनाय नीयेत । कर्तुश्च द्विशतो दण्ड पणच्छेदं वा । (४) तुलाप्रतिमानमाण्डं पौतवहस्तात्क्रीणीयुः । अन्यथा द्वादशपणो दण्डः । (५) घनं घनसुषिरं संयूह्यमवलेप्यं सङ्घात्यं वासितकं च कारुकर्म ।


( १ ) यदि खोटे सोने-चाँदी के आभूषण बनाने के लिए दिए जाँय तो सुनार को एक काकणी ( ¼ माष ) छीजन देनी चाहिए । सोने का रङ्ग बदलने के लिए एक काकणी लोहा और दो काकणी चाँदी उसमें मिलानी चाहिए । एक काकणी लोहा और दो काकणी चाँदी का छटा भाग छीजन के लिए निकाल लेना चाहिए ।

( २ ) यदि अपनी अज्ञानता के कारण सुनार एक माष सुवर्ण को कांतिहीन कर दे तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए; तौल में कम करे तो मध्यम साहस दण्ड; और तराजू-बाट में कपट करे तो उत्तम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए; इसी प्रकार सोने-चाँदी के बने हुए पात्र में यदि कोई व्यक्ति हेर-फेर करे तो उसे भी उत्तम साहस दण्ड दिया जाना चाहिए ।

( ३ ) सौवर्णिक की अनुमति प्राप्त कर या न प्राप्त कर यदि कोई व्यक्ति शिल्प-शाला ( विशिखा ) से बाहर किसी सुनार से आभूषण बनवाये तो उसे बारह पण दण्ड देना चाहिए, और जेवर बनाने वाले सुनार को चौबीस पण । उनके लिए यह दण्ड-व्यवस्था उसी दशा में है यदि उन पर चोरी की आशंका न हो तो और यदि उन पर चोरी किए जाने की आशंका हो तो उन्हें कण्टकशोधक ( प्रदेष्टा ) के पास न्याय के लिए ले जाना चाहिए । यदि अपराध सिद्ध हो जाय तो सुनार पर दो-सौ पण दण्ड निर्धारित किया जाय और इतना धन देने से यदि वह इन्कार करे तो उसकी उंगलियाँ कटवा देनी चाहिए ।

( ४ ) सुनारों को चाहिए कि वे सोना-चाँदी तौलने के बाट-तराजू कहीं से न खरीद कर पौतवाध्यक्ष के यहाँ से ही खरीदें । यदि वे ऐसा नहीं करते तो उन पर बारह पण का दण्ड कर देना चाहिए ।

( ५ ) सुनारों के १. घन ( ठोस गहना ), २. घनसुषिर ( ऊपर से ठोस तथा भीतर से पोले कड़ा आदि गहने ), ३. संयूह्य (ऊपर से मोटा पत्ता चढ़ाये आभूषण),