कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
पृष्ठ 258, कुल 918 में से
संदर्भ में पढ़ें| प्रकरण ३५ | # तुलामानपौतवम् |
|---|---|
| अध्याय १९ |
(१) पौतवाध्यक्षः पौतवकर्मान्तान् कारयेत् ।
(२) धान्यमाषा दश सुवर्णमाषकः । पञ्च वा गुञ्जाः । ते षोडश सुवर्णः कर्षो वा । चतुष्कर्षं पलम् ।
(३) अष्टाशीतिगौरसर्षपा रूप्यमाषकः । ते षोडश धरणम् । शैम्ब्यानि वा विंशतिः ।
(४) विंशतितण्डुलं वज्रधरणम् ।
तोल और माप का अध्यक्ष
( १ ) पौतवाध्यक्ष (तोल-माप की जांच करने वाला सरकारी अफसर) को चाहिये कि वह शास्त्रोक्त विधि से तोलने-मापने के साधन तराजू, बाट आदि बनवाये ।
( २ ) दस उड़द के दाने अथवा पाँच रत्ती परिमाण का एक सुवर्णमाषक होता है । सोलह माष का एक सुवर्ण या एक कर्ष होता है । चार कर्ष का एक पल होता है; अर्थात् :
सोने का तोल
$$\left.\begin{array}{l} \text{१० उर्द के दाने} \ \text{५ रत्ती} \end{array}\right} = \text{१ सुवर्णमाषक}$$
१६ माष = १ सुवर्ण या १ कर्ष
४ कर्ष = १ पल
( ३ ) अठ्ठासी सफेद सरसों परिमाण का एक रूप्यमापक होता है । सोलह रूप्यमापक या बीस मूली के बीज परिमाण का एक धरण होता है; जैसे :
चाँदी का तोल
८८ सफेद सरसों = १ रूप्यमाषक
$$\left.\begin{array}{l} \text{१६ रूप्यमाषक} \ \text{२० मूली के बीज} \end{array}\right} = \text{१ धरण}$$
( ४ ) बीस चावल परिमाण का एक वज्रधरण होता है :
हीरे का तोल
२० चावल = १ वज्रधरण