भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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२४२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ दूसरा अधिकरण

(१) तेषु चैतावच्चातुर्वर्ण्यमेतावन्तः कर्षकगोरक्षकवैदेहककारुकर्मकर-दासाश्चैतावच्च द्विपदचतुष्पदमिदं च हिरण्यविष्टिशुल्कदण्डं समुत्तिष्ठतीति । (२) कुलानां च स्त्रीपुरुषाणां बालवृद्धकर्मचरित्राजीवव्ययपरिमाणं विद्यात् । (३) एवञ्च जनपदचतुर्भागं स्थानिकः चिन्तयेत् । (४) गोपस्थानिकस्थानेषु प्रदेष्टारः कार्यकरणं बलिप्रग्रहं च कुर्युः । (५) समाहर्तृप्रदिष्टाश्च गृहपतिकव्यञ्जना येषु ग्रामेषु प्रणिहितास्तेषां ग्रामाणां क्षेत्रगृहकुलाग्रं विद्युः । मानसञ्जाताभ्यां क्षेत्राणि भोगपरिहा-

जो ग्रामवासियों के काम न आते हों, खेतों में जाने-आने के रास्ते, उनकी नाप, किस व्यक्ति ने किस व्यक्ति को कौन खेत जोतने लिए दिया है, बिक्री का ब्योरा, तकाबी, मुल्तबी और छूट आदि का भी उल्लेख होना चाहिए । साथ ही रजिस्टर में यह भी दर्ज होना चाहिए कि वहाँ कितने घर, जमीन की किस्त तथा मकानों का किराया देने वाले हैं और कितने नहीं हैं ।

( १ ) रजिस्टर में इस बात का उल्लेख किया जाय कि उन घरों में इतने ब्राह्मण, इतने क्षत्रिय, इतने वैश्य और इतने शूद्र रहते हैं, इसी प्रकार वहाँ के किसान, ग्वाले, व्यापारी, कारीगर, मजदूर, और दासों की संख्या भी रजिस्टर में दर्ज होनी चाहिये, फिर सारे मनुष्यों और सारे पशुओं का जोड़ अलग-अलग लिया जाय, अन्त में इनसे इतना सोना, इतने नौकर, इतना टैक्स और इतना दण्ड राजा को प्राप्त हुआ, यह भी जोड़ देना चाहिए ।

( २ ) गोप नामक अधिकारी को चाहिए कि वह प्रत्येक परिवार के स्त्री पुरुष, बालक तथा वृद्ध की गणना और उनके कार्य, चरित्र, आजीविका एवं व्यय आदि के सम्बन्ध में पूरी जानकारी रखे ।

( ३ ) इसी प्रकार जनपद के चौथे हिस्से का प्रबन्ध स्थानिक नामक अधिकारी करे ।

( ४ ) गोप और स्थानिक के कार्यक्षेत्र में प्रदेष्टा ( कण्टक शोधनाधिकारी ) नामक अधिकारी राज्य के शत्रुओं का दमन करें । गोप और स्थानिक टैक्स न देने वालों से टैक्स वसूल करें । राज्य के बलवान् व्यक्ति यदि शासन में विघ्न-बाधा उपस्थित करें तो उनका भी वे दमन करें ।

( ५ ) गृहस्थ ( गृहपति ) के वेश में रहने वाले गुप्तचर, समाहर्त्ता की आज्ञानुसार अपने क्षेत्र के गाँवों का रकवा, घर और परिवारों की तादात को अच्छी तरह से जानें । वे गुप्तचर यह नोट रखें कि कौन खेत कितने बड़े हैं और उनकी उपज क्या है, किस घर से कर वसूल किया जाता है और कौन घर छोड़ा जाता है, यह

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