भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्र० ६० : अ० ४ ] विवाह सम्बन्ध ( ३ ) २७१

(१) सपुरुषं वा ज्ञातिकुलम्; कुतो हि साध्वीजनस्यच्छलं, सुखमे- तदवबोद्धुम्, इति कौटिल्यः । (२) प्रेतव्याधिव्यसनगर्भनिमित्तमप्रतिषिद्धमेव ज्ञातिकुलगमनम् । (३) तन्निमित्तं वारयतो द्वादशपणो दण्डः । तत्रापि गूहमाना स्त्रीधनं जीयेत, ज्ञातयो वा छादयन्तः शुल्कशेषम् । इति निष्पतनम् । (४) पतिकुलान्निष्पत्य ग्रामान्तरगमने द्वादशपणो दण्डः स्थाप्याभरण- लोपश्च । गम्येन वा पुंसा सह प्रस्थाने चतुर्विंशतिपणः, सर्वधर्मलोपश्चान्यत्र भर्मदानतीर्थगमनाभ्याम् । पुंसः पूर्वः साहसदण्डः तुल्यश्रेयसः, पापीयसो मध्यमः । बन्धुरदण्ड्यः । प्रतिषेधेऽर्धदण्डः ।


में निरीक्षक, भिक्षुकी या अपने किसी सम्बन्धी के पुरुषरहित घर में प्रवेश करे तो उसको दोषी नहीं समझा जाना चाहिए ।

( १ ) इस सम्बन्ध में आचार्य कौटिल्य का मत है कि ऊपर कही गई अवस्थाओं में कोई भी साध्वी स्त्री अपने उन सम्बन्धियों या परिवारजनों के घरों में भी जा सकती है, जहाँ पुरुष विद्यमान हों, क्योंकि उसके छलपूर्ण व्यवहार उसके पति तथा सम्बन्धियों से छिपे नहीं रह सकते हैं ।

( २ ) मृत्यु, बीमारी, विपत्ति और प्रसव काल में स्त्री अपने सम्बन्धियों के यहाँ जा सकती है ।

( ३ ) ऊपर कहे गए अवसरों पर यदि कोई पुरुष अपनी स्त्री को अपने सम्ब-न्धियों के यहाँ जाने से रोके तो वह बारह पण दण्ड का अपराधी है । यदि कोई स्त्री जाकर भी अपने जाने की बात को छिपाये तो उसका स्त्री-धन जब्त कर लिया जाय । यदि सम्बन्धी लोग लेने-देने के डर से ऐसे अवसरों की सूचना न दें तो उनको वर की ओर से अवशिष्ट देय धन न दिया जाय । यहाँ तक स्त्रियों के घर से बाहर जाने ( निष्पतन ) के सम्बन्ध में विचार किया जाय ।

( ४ ) रास्ते में किसी परपुरुष के साथ स्त्री का चलना : पतिघर से भाग कर सुदूर गाँव में जाने वाली स्त्री को बारह पण का दण्ड दिया जाय, और उसके नाम से जमा पूँजी तथा उसके आभूषण आदि जब्त कर लिये जाँय । यदि वह मैथुन के लिए किसी पुरुष का सहवास करे तो उस पर चौबीस पण दण्ड किया जाय और यज्ञयागादि धर्मकार्यों में उसको सहधर्मिणी के अधिकार से वंचित किया जाय; किन्तु यदि वह घर के भरण-पोषण या दूसरी जगह में रहने वाले पति के समीप ऋतुगमन के लिए जाय तो उसे अपराधिनी न माना जाय । यदि उच्च वर्ण का व्यक्ति इस अपराध को करे तो उसे प्रथम साहस दण्ड दिया जाय; और निम्न वर्ण के व्यक्ति को मध्यम साहस दण्ड । भाई यदि इस अपराध को करे तो दण्डनीय नहीं होता । यदि निषेध किए जाने के बाद वह इस अपराध को करे तो उसे आधा दण्ड दिया जाय ।