भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

पृष्ठ 380, कुल 918 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 380

२९६ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण

(१) ग्रामार्थेन ग्रामिकं व्रजन्तमुपवासाः पर्यायेणानुगच्छेयुः । अननुगच्छन्तः पणार्धपणिकं योजनं दद्युः । (२) ग्रामिकस्य ग्रामादस्तेनपारदारिकं निरस्यतश्चतुर्विंशतिपणो दण्डः । ग्रामस्योत्तमः । (३) निरस्तस्य प्रवेशो ह्यधिगमेन व्याख्यातः । (४) स्तम्भैः समन्ततो ग्रामाद्धनुःशतापकृष्टमुपसालं कारयेत् । (५) पशुप्रचारार्थं विवीतमालवनेनोपजीवयेयुः । (६) विवीतं भक्षयित्वापसृतानामुष्ट्रमहिषाणां पादिकं रूपं गृह्णीयुः । गवाश्वखराणां चार्थपादिकम् । क्षुद्रपशूनां षोडशभागिकम् । (७) भक्षयित्वा निष्षण्णानामेत एव द्विगुणा दण्डाः । परिवसतां चतुर्गुणाः । ग्रामदेववृषा वा अनिर्दशाहा वा धेनुरुक्षाणो गोवृषाश्चादण्ड्याः ।


( १ ) जब गाँव का मुखिया गाँव के किसी कार्य से बाहर जाये तो अपनी पारी के अनुसार गाँव वाले उसके साथ रहें। जो अपनी पारी पर न जायें उन पर योजन के हिसाब से डेढ़ पण जुर्माना किया जाय ।

( २ ) यदि गाँव का मुखिया, चोर या व्यभिचारी के अतिरिक्त किसी दूसरे को गाँव से निकाल दे तो उस मुखिया पर चौबीस पण दण्ड किया जाय । यदि सारा गाँव मिल कर ऐसे निरपराधी व्यक्ति को गाँव से निकाले तो सारे गाँव पर उत्तम साहस दण्ड किया जाय ।

( ३ ) इसी प्रकार यदि गाँव से बाहर गया हुआ कोई व्यक्ति पुनः गाँव में बसना चाहे और मुखिया तथा गाँव वाले उसको न बसने दें तो मुखिया पर चौबीस पण दण्ड और गाँव वालों पर उत्तम साहस दण्ड किया जाय ।

( ४ ) गाँव से चार-सौ हाथ की दूरी पर पशुओं के आरामदेह के लिए चारों ओर खम्भों से घिरा हुआ एक बाड़ा बनवाया जाय ।

( ५ ) चरागाहों का प्रबन्ध—पशुओं के घूमने और चरने-फिरने के लिए जंगल में चरागाह बनवाये जाँय ।

( ६ ) ऊँट और भैंस आदि बड़े पशुओं को यदि उनके मालिक चरागाह में चराकर अपने घर बाँधने के लिए ले जाँय, तो उनसे चराई का १/४ पण कर लिया जाय । गाय, घोड़े और गधे आदि मध्यम श्रेणी के पशुओं की चराई १/८ पण; इसी प्रकार भेड़, बकरी आदि छोटे पशुओं की चराई १/१६ पण कर रूप में उनके मालिकों से वसूल कर लिया जाय ।

( ७ ) जो जानवर चरकर चरागाह में ही रहें उनके मालिकों से पूर्वोक्त राशि से दुगुना कर लिया जाय । जो बराबर चरागाह में ही रहें उनके मालिकों से चौगुना कर लिया जाय । ग्रामदेवता के नाम से छोड़े गए साड़ों, दस दिन की ब्याई हुई गायों और गायों के साथ रहने वाले बछड़ों पर कोई कर न लिया जाय ।