भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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३१४ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ तीसरा अधिकरण

(१) दासं दासीं वा निष्क्रीय पुनर्वििक्रयाधानं नयतो द्वादशपणो दण्डः, अन्यत्र स्वयंवादिभ्यः । इति दासकल्पः । (२) कर्मकरस्य कर्मसम्बन्धमासन्ना विद्युः । यथासम्भाषितं वेतनं लभेत । कर्मकालानुरूपमसम्भाषितवेतनम् । कर्षकः सस्यानां, गोपालकः सर्पिषां, वैदेहकः पण्यानामात्मना व्यवहृतानां दशभागमसम्भाषितवेतनो लभेत । सम्भाषितवेतनस्तु यथासम्भाषितम् । (३) कारुशिल्पिकुशीलवचिकित्सकवाग्जीवनपरिचारकादिराशाकारिकवर्गस्तु यथान्यस्तद्विधः कुर्यात् । यथा वा कुशलाः कल्पयेयुः तथा वेतनं लभेत । साक्षिप्रत्ययमेव स्यात् । साक्षिणामभावे यतः कर्म ततोऽनुयुञ्जीत । (४) वेतनादाने दशबन्धो दण्डः, षट्पणो वा । अपव्ययमाने द्वादशपणो दण्डः, पंचबन्धो वा ।


और उसकी माता, दोनों को दासता से मुक्त कर दिया जाय । यदि वह स्त्री सद्गृहिणी बनकर स्वामी के घर में ही उसकी पत्नी बनकर रहना चाहे तो उसकी माँ, बहिन और भाइयों को दासता से मुक्त कर दिया जाय ।

( १ ) एक बार मुक्त हुए दास-दासी को यदि फिर कोई व्यक्ति बेचे या गिरवी रखे तो उस पर बारह पण दण्ड किया जाय । किन्तु दास-दासी ही यदि स्वयं बिकने और गिरवी रखे जाने को कहें तो किसी को दोष न दिया जाय । यहां तक दास-दासियों के सम्बन्ध में निरूपण किया गया ।

( २ ) नौकर का वेतन : पास-पड़ोस के रहने वालों की जानकारी में ही नौकर की नियुक्ति की जाय । जिसका वेतन तय हो गया हो वह उसी पर कार्य करे; किन्तु जिसका वेतन पहिले तय न हुआ हो वह अपने कार्य और समय के अनुसार अपना वेतन ले । किसान का नौकर अनाज का, ग्वाले का नौकर घी का और बनिये का नौकर अपने द्वारा व्यवहार की हुई वस्तुओं का दसवां हिस्सा ले; बशर्ते कि उसका वेतन तय न हुआ हो । यदि वेतन पहिले से तय है तो उसी पर नौकरी करे ।

( ३ ) कारीगर, नट, नर्तक, चिकित्सक, वकील ( वाग्जीवन ) और नौकर-चाकर आदि मेहनताने की आशा से कार्य करने वाले ( आशाकारिक ) व्यक्तियों को वैसा ही वेतन दिया जाय, जैसा अन्यत्र दिया जाता हो, अथवा जो भी वेतन कुशल पुरुष नियत कर दे तदनुसार दिया जाय । इस विषय पर विवाद होने पर साक्षियों के अनुसार ही निर्णय दिया जाय । यदि साक्षी न हों तो जैसा कार्य किया हो, उसी के अनुसार फैसला किया जाय ।

( ४ ) उनका वेतन न देने पर वेतन का दसवां हिस्सा या छह पण दण्ड किया जाय । अपव्यय करने पर उसका पांचवां हिस्सा या बारह पण दण्ड किया जाय ।