कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ८१ : अ० ६ ] सन्दिग्ध परीक्षा ३६९
लब्धमिति । स चेद् ब्रूयात्—दायाद्यादवाप्तममुष्माल्लब्धं, क्रीतं कारित- माधिप्रच्छन्नम्, अयमस्य देशः कालश्चोपसम्प्राप्तः, अयमस्यार्घः प्रमाणं लक्षणं मूल्यं चेति । तस्यागमसमाधौ मुच्येत ।
(१) नाष्टिकश्चेत्तदेव प्रतिसंदध्यात्, यस्य पूर्वो दीर्घश्च परिभोगः शुचिर्वा देशस्तस्य द्रव्यमिति विद्यात् । चतुष्पदानापि हि रूपलिङ्गसा- मान्यं भवति, किमङ्गपुनरेकयोनिद्रव्यकर्तृप्रसूतानां कुप्याभरणभाण्डानाम्- इति ।
(२) स चेद् ब्रूयात्—याचितकमवक्रीतकमाहितं निक्षेपमुपनिधिं वैयावृत्यकर्म वाऽमुष्येति, तस्यापसारप्रतिसन्धानेन मुच्येत ।
(३) नैवमित्यपसारो वा ब्रूयात्, रूपाभिगृहीतः परस्य दानकारण- मात्मनः प्रतिग्रहकारणमुपलिङ्गनं वा दायकदापकनिबन्धकप्रतिग्राहकोप- देष्टृभिरुपश्रोतृभिर्वा प्रतिसमानयेत् ।
कि 'मुझे यह बपौती से मिली है मैंने इसको अमुक व्यक्ति से लिया है अथवा मैंने इसको खरीदा या बनवाया है या अभी तक गिरवी रखने के कारण यह वस्तु छिपी रही, यह वस्तु मैंने अमुक स्थान पर अमुक समय में खरीदी है, इसका असली मूल्य यह है, इसके यह लक्षण हैं, यह प्रमाण है, आजकल इसकी इतनी कीमत है' इस प्रकार उसका ठीक-ठीक वृत्तान्त बता देने पर उसको अपराधी न समझा जाय ।
( १ ) यदि खोई गई या चोरी गई वस्तु का मालिक उक्त वस्तु को अपनी बताये तो उन दोनों में से उस वस्तु का असली मालिक उसी व्यक्ति को माना जाय, जो वस्तु का अधिक दिनों से उपभोग करता आ रहा हो और जिसके साक्षी विश्वस्त एवं सच्चे हों । क्योंकि बहुधा यह देखा जाता है कि भिन्न-भिन्न योनियों में पैदा हुए चौपायों तक में अविकल साम्य होता है, ऐसी स्थिति में कोई असम्भव नहीं कि एक ही कारीगर द्वारा एक ही द्रव्य से बनी हुई वस्तुओं में परस्पर साम्य न हो ।
( २ ) यदि उस वस्तु को लाने वाला व्यक्ति ऐसा कहे कि 'यह वस्तु मैं अमुक व्यक्ति से माँग कर लाया हूँ, या किराये पर लाया हूँ, या मेरे पास इसको गिरवी रखा गया है, या कुछ वस्तु बनाने के लिए मेरे पास रखा गया है, या मेरे पास सुरक्षा के लिए दे गया है, या अमुक व्यक्ति से वेतन रूप में मैंने इसको पाया है, तो उस असली व्यक्ति को बुलाया जाय । यदि वह कहे कि 'जो कुछ इसने कहा है वह ठीक है' तो उस वस्तु को लाने वाले व्यक्ति को छोड़ दिया जाय ।
( ३ ) यदि वह कह दे 'इसने ठीक नहीं कहा है' तो वस्तु के लाने वाले व्यक्ति को अदालत में पेश किया जाय और वहाँ वह इस बात को सिद्ध करे कि 'यह वस्तु मैंने इसी से ली है।' साथ ही वह उस वस्तु के देने वाले, दिलाने वाले, लिखने वाले, लेने वाले, लिखाने वाले तथा साक्षियों को अदालत में पेश करे ।
२४ कौ०