कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंप्र० ८५ : अ० १० ] एकाङ्गवध अथवा द्रव्यदण्ड ३८७
(१) कारुशिल्पिकुशीलवतपस्विनां क्षुद्रकद्रव्यापहारे शत्यो दण्डः । स्थूलकद्रव्यापहारे द्विशतः । कृषिद्रव्यापहारे च । (२) दुर्गमकृतप्रवेशस्य प्रविशतः प्राकारच्छिद्राद्वा निक्षेपं गृहीत्वाऽपसरतः कन्धरावधो द्विशतो वा दण्डः । (३) चक्रयुक्तां नावं क्षुद्रपशुं वापहरत एकपादवधः त्रिशतो वा दण्डः । (४) कूटकाकपण्यक्षारला शलाकाहस्तविषमकारिण एकहस्तवधः, चतुःशतो वा दण्डः । (५) स्तेनपारदारिकयोः साचिव्यकर्मणि स्त्रियाः संगृहीतायाश्च कर्णनासाछेदनं पञ्चशतो वा दण्डः । पुंसो द्विगुणः । (६) महापशुमेकं दासं दासीं वापहरतः प्रेतभाण्डं वा विक्रीणानस्य द्विपादवधः, षट्छतो वा दण्डः । (७) वर्णोत्तमानां गुरूणां च हस्तपादलंघने राजयानवाहनाद्यारोहणे चैकहस्तपादवधः सप्तशतो वा दण्डः ।
( १ ) जो व्यक्ति बढ़इयों, छोटे कारीगरों, कथकों और तपस्वियों की छोटी-छोटी चीजों की चोरी करे उस पर सौ पण दण्ड किया जाय और बड़ी-बड़ी चीजों की चोरी करे तो दो-सौ पण दण्ड किया जाय । खेती के साधन हल आदि चुराने वाले पर भी दो-सौ पण दण्ड किया जाय ।
( २ ) यदि अनधिकारी व्यक्ति किले में प्रवेश करे अथवा परकोटे की दीवार तोड़ कर माल उड़ा ले जाय तो उसके पैर के पीछे की दो मुख्य नसें कटवा दी जाँय, या उस पर दो-सौ पण दण्ड किया जाय ।
( ३ ) चक्रयुक्त ( धन, शस्त्र या यंत्र युक्त ) नाव को अथवा छोटे-छोटे पशुओं की चोरी करने वाले का एक पैर कटवा दिया जाय या उस पर तीन-सौ पण दण्ड दिया जाय ।
( ४ ) जो व्यक्ति जाली कौड़ी, पांसें, अरला और शलाका आदि जुआ संबंधी सामान बनाये, तथा जो व्यक्ति इसी प्रकार की अन्य कूट-कपट की चीजें बनाये, उसका एक हाथ काट दिया, या उस पर चार सौ पण जुर्माना किया जाय ।
( ५ ) चोरों और व्यभिचारियों की दूतियों के नाक, कान काट लिये जाँय या उन पर पाँच सौ पण दण्ड किया जाय । यदि पुरुष ऐसा दूतकर्म करें तो उन पर दुगुना ( एक हजार पण ) दण्ड दिया जाय ।
( ६ ) गाय, भैंस आदि पशुओं, एक दास, एक दासी को चुराने वाले अथवा मुर्दे के कपड़े बेचने वाले पुरुष के दोनों पैर काट लिये जाँय या उस पर छह-सौ पण दण्ड दिया जाय ।
( ७ ) जो व्यक्ति श्रेष्ठ पुरुषों या गुरुजनों को हाथ-पैर से मारे या राजा की सवारी एवं घोड़े पर चढ़े उसका या तो एक हाथ और एक पैर काट दिया जाय अथवा उस पर सात-सौ पण दण्ड दिया जाय ।