भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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प्रकरण ८६## शुद्धश्चित्रश्च दण्डकल्पः
अध्याय ११

(१) कलहे घ्नतः पुरुषं चित्रो घातः । सप्तरात्रस्यान्तः मृते शुद्धवधः पक्षस्यान्तरुत्तमः । मासस्यान्तः पञ्चशतः समुत्थानव्ययश्च ।

(२) शस्त्रेण प्रहरत उत्तमो दण्डः । मदेन हस्तवधः । मोहेन द्विशतः । वधे वधः ।

(३) प्रहारेण गर्भं पातयत उत्तमो दण्डः । भैषज्येन मध्यमः । परिक्लेशेन पूर्वः साहसदण्डः ।

(४) प्रसभं स्त्रीपुरुषघातकाभिसारकनिग्राहकावघोषकावस्कन्दकोपवेधकान् पथि वेश्मप्रतिरोधकान् राजहस्त्यश्वरथानां हिंसकान् स्तेनान् वा शूलानारोहयेयुः ।


शुद्धदण्ड और चित्रदण्ड

( १ ) कोई व्यक्ति यदि लड़ाई-झगड़े में किसी व्यक्ति को जान से मार डाले तो उसको कष्टपूर्वक प्राणदण्ड ( चित्रघात ) की सजा दी जाय । झगड़ा होने के बाद चोट खाया व्यक्ति यदि सात दिन बाद मरे तो मारने वाले को शुद्ध प्राणदण्ड ( कष्टरहित वध ) दिया जाय । यदि पन्द्रह दिन बाद मरे तो उत्तम साहस दण्ड दिया जाय । एक महीने के बाद मरे तो पाँच-सौ पण जुर्माना और साथ ही मृतक की दवाई-दारू का सारा व्यय भी मरने वाले से वसूल किया जाय ।

( २ ) किसी शस्त्र द्वारा चोट पहुँचाने पर उत्तम साहस दण्ड दिया जाय । यदि बल के घमंड से चोट पहुँचाये तो उसका हाथ काट दिया जाय । यदि क्रोधावेश में प्रहार करे तो उस पर दो सौ पण दण्ड दिया जाय । यदि जान से मार डाले तो उसको प्राणदण्ड की सजा दी जाय ।

( ३ ) जो व्यक्ति प्रहार द्वारा गर्भ गिराये उसको उत्तम साहस दण्ड दिया जाय । औषध द्वारा गर्भ गिराने वाले को मध्यम साहस दण्ड दिया जाय । कठोर काम कराकर गर्भ गिराने वाले को प्रथम साहस दण्ड दिया जाय ।

( ४ ) यदि कोई व्यक्ति बलात्कार से किसी स्त्री या पुरुष की हत्या कर डाले, बलात्कार से किसी स्त्री को अपहरण कर ले जाय, बलात्कार से किसी स्त्री की नाक-