कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४२२ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ पाँचवां अधिकरण
(१) आर्ययुक्तारोहकमाणवकशैलखनकाः सर्वोपस्थायिन आचार्या विद्यावन्तश्च पूजावेतनानि यथार्हं लभेरन् पञ्चशतावरं सहस्रपरम् । (२) दशपणिको योजने दूतो मध्यमः । दशोत्तरे द्विगुणवेतन आयोजन-शतादिति । (३) समानविद्येभ्यस्त्रिगुणवेतनॊ राजा राजसूयादिषु ऋतुषु राज्ञः सारथिः साहस्रः । (४) कापटिकोदास्थितगृहपतिकवैदेहकतापसव्यञ्जनाः साहस्राः । (५) ग्रामभृतकसत्रीतीक्ष्णरसदभिक्षुक्यः पञ्चशताः । (६) चारसञ्चारिणोऽर्धतृतीयशताः । प्रयासवृद्धवेतना वा । (७) शतवर्गसहस्रवर्गाणामध्यक्षा भक्तवेतनलाभमादेशं विक्षेपं च कुर्युः । अविक्षेपे राजपरिग्रहदुर्गराष्ट्ररक्षावेक्षणेषु च नित्यमुख्याः स्युरनेकमुख्याश्च ।
( १ ) आर्य ( सत्पुरुष ), युक्तारोहक ( विगड़ैल घोड़े का सवार ), माणवक ( वेदाध्यायी विद्यार्थी ) शैलखनक ( पत्थर आदि पर नक्काशी करने वाला ), सर्वोपस्थायिन आचार्य ( निपुण गायनाचार्य ) और विद्वान्, इन लोगों को योग्यतानुसार पाँच सौ से हजार पण तक वेतन प्रति वर्ष दिया जाय ।
( २ ) मध्यगति से एक योजन तक जाने-आने वाले दूत को दस पण वेतन दिया जाय । दस योजन से सौ योजन तक चलने वाले को बीस पण वेतन दिया जाय ।
( ३ ) राजा को चाहिए कि वह राजसूय आदि यज्ञों पर मंत्री, पुरोहित आदि को उनके निर्धारित वेतन से तिगुना वेतन दे; इसी प्रकार राजा को यज्ञ स्थान में लाने वाले सारथि को एक हजार पण वेतन दिया जाय ।
( ४ ) कापटिक, उदास्थित, गृहपतिक, वैदेहक, और तापस आदि के वेश में कार्य करने वाले गुप्तचरों को प्रतिवर्ष हजार पण वेतन दिया जाय ।
( ५ ) धोबी, नाई आदि गाँव के नौकर, गाँव के मुखिया, खत्री, तीक्ष्ण तथा भिक्षुकी आदि के वेश में काम करने वाले गुप्तचरों को पाँच सौ पण वेतन दिया जाय ।
( ६ ) गुप्तचरों को इधर-उधर भेजने वाले कर्मचारियों को ढाई सौ पण वेतन दिया जाय । अथवा मेहनत के अनुसार सबको अधिक वेतन दिया जाय ।
( ७ ) शतवर्ग के या सहस्रवर्ग के अध्यक्षों को चाहिए कि वे नौकरों को यथोचित वेतन दिलायें, उनसे राजाज्ञा का पालन करायें, और आवश्यकतानुसार उनकी नियुक्ति तथा उनका स्थानान्तरण ( विक्षेप ) करायें । विभागीय अध्यक्षों को चाहिए कि वे जिस विभाग में ठीक तरह से कार्य न होता हो, वहाँ के लिए अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति करें; और प्रत्येक विभाग के कर्मचारियों को चाहिए कि वे अपने