भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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पृष्ठ 825

प्र० १७७ : अ० १ ] शत्रु-वध के प्रयोग ७४१

(१) दूषीविषं मदनकोद्रवचूर्णमुपजिह्विकायोगः मातृवाहकाञ्जलिकारप्रचलाकभेकाक्षिपीलुकयोगो विषूचिकाकरः । (२) पञ्चकुष्ठककौण्डिन्यकराजवृक्षपुष्पमधुयोगो ज्वरकरः । (३) भासनकुलजिह्वाग्रन्थिकायोगः खरीक्षीरपिष्टो मूकबधिरकरो मासार्धमासिकः । कलामात्रं पुरुषाणामिति समानं पूर्वेण । (४) भङ्गक्वाथोपनयनमौषधानां चूर्णं प्राणभृताम् । सर्वेषां वा क्वाथोपनयनम्, एवं वीर्यवत्तरं भवति । इति योगसम्पत् । (५) शाल्मलीविदारीधान्यसिद्धो मूलवत्सनाभसंयुक्तश्चुचुन्दरीशोणितप्रलेपेन दिग्घो बाणो यं विध्यति, स विद्धोऽन्यान् दश पुरुषान् दशति, ते दष्टा दशान्यान् दशन्ति पुरुषान् । (६) भल्लातकयातुधानापामार्गबाणानां पुष्पैरेल्काक्षिगुग्गुलुहालाहलानां च कषायं बस्तनरशोणितयुक्तं दंशयोगः । ततोऽर्धधरणिको योगः


( १ ) औषधियों से शुद्ध किया हुआ विष, धतूरा और कोदो का चूर्ण दीमक ( उपजिह्विका ) के साथ मिलाकर फिर मातृवाह पक्षी, अंजलिकार ओषधि, मोरपेंच ( प्रचालक ), मेंढ़क, सहिजन और पीलु के साथ तैयार किया हुआ योग हैजा पैदा कर देता है ।

( २ ) कूट वृक्ष के पाँचों अंग, कौण्डिन्य नामक कीड़ा, अमलतास ( राजवृक्ष ), शहद और महुआ ( पुष्पमधु ), इन सब चीजों का योग ज्वर उत्पन्न कर देता है ।

( ३ ) यदि गिद्ध, नेवला और मजीठ का योग गधी के दूध में पीसा जाय तो वह योग महीने या पन्द्रह दिन के भीतर मनुष्य को गूंगा और बहिरा बना देता है । इन सभी योगों की मात्रा मनुष्य के लिए एक कला, घोड़े, गधे के लिए उससे दुगुनी और हाथी, ऊँट आदि के लिए उससे चौगुनी होनी चाहिए ।

( ४ ) ऊपर बताये गये सभी योगों में जो औषधियाँ हैं कूट-कूट कर उनका क्वाथ बनाना चाहिए । प्राणियों के उपयोग के लिए उसका चूर्ण या क्वाथ बनाकर उपयोग में लाना चाहिए, क्योंकि ऐसा करने से औषधि अधिक प्रभावकारी हो जाती है । यहाँ तक विशेष-विशेष योगों का निरूपण किया गया ।

( ५ ) सेमर, बिदारी और धनियाँ की भावना देकर तथा पिप्पलीमूल एवं वत्सनाभ से युक्त और छछून्दर के रक्त से लेप किया हुआ बाण जिसको लगता है वह व्यक्ति दूसरे दस व्यक्तियों को काट लेता है; और वे दस व्यक्ति दूसरे दस-व्यक्तियों को काट खाते हैं । इस प्रकार विष के फैल जाने से सारी शत्रु सेना नष्ट हो जाती है ।

( ६ ) भिलावा, यातुधान, अपामार्ग और अर्जुन वृक्ष ( बाण ), इन सब चीजों के फूलों से सिद्ध किया हुआ; इलायची, अक्षी, गूगल तथा हलाहल को मिलाकर बनाया हुआ काढ़ा यदि बकरे और मनुष्य के रक्त में मिला दिया जाय तो वह दंश-