भारतकोश
कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola

आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा

DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ

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७५८ कौटिल्य का अर्थशास्त्र [ चौदहवां अधिकरण

(१) पुनर्नवमवाचीनं निम्बः काकमधुश्च यः। कपिरोम मनुष्यास्थि बद्ध्वा मृतकवाससा ॥ निखन्यते गृहे यस्य पिष्ट्वा वा यं प्रपाययेत् । सपुत्रदारः सधनस्त्रीन्पक्षान्नातिवर्तते ॥ (२) पुनर्नवमवाचीनं निम्बः काकमधुश्च यः। स्वयंगुप्ता मनुष्यास्थि पदे यस्य निखन्यते ॥ द्वारे गृहस्य सेनाया ग्रामस्य नगरस्य वा। सपुत्रदारः सधनस्त्रीन् पक्षान्नातिवर्तते ॥ (३) अजमर्कटरोमाणि मार्जारनकुलस्य च। ब्राह्मणानां श्वपाकानां काकोलूकस्य चाहरेत् ॥ एतेन विष्ठावक्षुण्णा सद्य उत्सादनकारिका। (४) प्रेतनिर्मालिका किण्वं रोमाणि नकुलस्य च ॥ वृश्चिकाल्यहिकृत्तिश्च पदे यस्य निखन्यते। भवत्यपुरुषः सद्यो यावत्तन्नापनीयते ॥ (५) त्रिरात्रोपोषितः पुष्येण शस्त्रहतस्य शूलप्रोतस्य वा पुंसः शिरः- कपाले मृत्तिकायां गुञ्जा आवास्योदकेन च सेचयेत्। जातानाममावास्यायां

(१) दक्षिण की ओर पैदा होने वाला पुनर्नवा तथा जिसका फल कौओं के लिए स्वादुकर होता है, ऐसा काकमधु, नीम, बन्दर के बाल और मनुष्य की हड्डी, इन सबको मरे हुए आदमी के कपड़े में बाँध कर जिसके घर में गाड़ दिया जाता है अथवा जिसको पीस कर पिला दिया जाता है वह पुरुष डेढ़ मास के भीतर ही समस्त धन-जन के सहित विनष्ट हो जाता है।

(२) दक्षिण की ओर पैदा होने वाला पुनर्नवा, काकमधु, नीम, धमासा (स्वयंगुप्ता) और मनुष्य की हड्डी, इन सबको जिसके घर, सेना, गाँव, नगर या दरवाजे पर गाड़ दिया जाता है वह व्यक्ति डेढ़ मास के भीतर समस्त जन-धन के सहित विनष्ट हो जाता है।

(३) बकरा, बन्दर, बिल्ली, नेवला, ब्राह्मण, चाण्डाल, कौआ और उल्लू, इन सबके बालों को इकट्ठा करके तथा जिसको मारना हो उसका पाखाना इन बालों के साथ मिलाकर उसका स्पर्श कराते ही उस व्यक्ति की तत्काल मृत्यु हो जाती है।

(४) मुर्दे पर डाली गई माला, सुराबीज और नेवले के बाल इन सबको यदि बिच्छू, भौंरा और सांप, इन तीनों की खाल के साथ मिलाकर किसी के स्थान पर गाड़ दिया जाय तो वह पुरुष तब तक नपुंसक बना रहता है, जब तक कि उसके स्थान से उन गड़ी हुई चीजों को न निकाला जाय।

(५) तीन रात तक उपवास करने के बाद पुष्य नक्षत्र में हथियार से मारे हुए