कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)

कौटिलीय अर्थशास्त्रम् (सटीक - डॉ. वाचस्पति गैरोला)
Kautiliya Arthashastra with Hindi Commentary by Gairola
आचार्य कौटिल्य (चाणक्य) / डॉ. वाचस्पति गैरोला द्वारा
DevanagariSanskritpublished918 पृष्ठ
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८३० कौटिल्य का अर्थशास्त्र
| सेतु ९९ | स्थानिक ७८ २४५ | हस्ति ६२ ७९ ९१ |
| सेतुवन ९१ | स्थानीय ७७ ९१ २५५ | ४१३ ४२१ ५७९ |
| सेनापति ४१० ४२० | स्थितयन्त्र १७० | हस्तिकर्म ६५३ |
| ४६३ ६४८ ६६५ | स्थिरकर्मा ४९० | हस्तिभूमि ६५१ |
| सौभिक ५४० | स्थूलकर्ण ६६३ | हस्तियुद्ध ६६० |
| सौराष्ट्रिक ८४ | स्नापक ३३ ५४१ | हस्तिवन ८२ |
| सौवर्णिक १५० | स्पष्टत्व १२० | हस्त्यध्यक्ष २२९ |
| सौवीर १६ ६७ | स्वचक्र ५७४ | हस्ती ७२ ८३ |
| स्कन्धावार ६३७ | स्वद्रव्यदान ६१९ | हाटक १४३ |
| स्तेय ३२८ | स्वयंग्राहदान ६१९ | हारहूरक २०२ |
| स्त्री ६६ ५६८ ५७० | स्वविक्षिप्त ५८१ | हीन ४४८ |
| स्त्रीधन २६२ | स्वसंज्ञा ७६५ | हेत्वर्थ ७६५ |
| स्त्रीधनकल्प २६१ | स्वामी ४४१ ६४० | हेमापसारित १५२ |
| स्त्रीव्यसन ५६९ | ह | हैहय १७ |
| स्थलपथ ५१३ | हरण १५२ | ह्रस्वकाल ६०९ |
| स्थविर ६७ | हरितपण्य ४१३ | |
| स्थान ४४५ ४६७ | हलमुख १७१ |