काव्यादर्श (महाकवि दण्डी - प्रसादिनी सान्वय हिन्दी व्याख्या सहित)
Kavyadarsha of Mahakavi Dandin with Prasadini Commentary
महाकवि दण्डी द्वारा
पृष्ठ 267, कुल 270 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री शिवनारायण शास्त्रीके अन्य ग्रन्थ (१) निरुक्तमीमांसा—यास्काचार्यके निरुक्तका सर्वाङ्गीण अध्ययन। डॉ० सिद्धेश्वरवर्माने इस ग्रन्थको 'अद्भुत' कहा है। उत्तरप्रदेश शासन, हरजीमल डालमिया ट्रस्ट ने पुरस्कारोंसे इसे सम्मानित किया है। (२) वैदिक वाङ्मयमें भाषा-चिन्तन—ऋषियोंके भाषा-चिन्तनका ऊह उनके कथनोंके आधारपर किया गया है। इसे भी उत्तरप्रदेश शासनने पुरस्कृत किया है। (३) निरुक्त (१-२, ७ अध्याय)—यह ग्रन्थ निरुक्ताध्यायी छात्रोंके लिए परम उपयोगी है। (४) निरुक्तके पाँच अध्याय—निरुक्तके १-४, ७ अध्यायों तथा तदन्तर्गत निघण्टुके वैज्ञानिक पाठशोध, हिन्दी अनुवाद, शोधात्मक व्याख्या, विस्तृत भूमिका और परिशिष्ट इस ग्रन्थको विद्वानोंके लिये संग्रहणीय बनाते हैं। (५) गीता-भाष्य-नवाम्बरा—शांकर-भाष्यसहित गीताके १-२ अध्यायों के अनुवाद, भाष्य-मर्म-प्रकाशिनी व्याख्या, विशद भूमिका और पारिभाषिक शब्दकोषसे युक्त है। (६) तर्कसंग्रह-तारोदय—हिन्दी अनुवाद, व्याख्या, सरल गम्भीर भूमिका से युक्त यह ग्रन्थ शास्त्रमें प्रवेशार्थियोंके लिये उपयोगी है। (७) सबालप्रबोधन्युपन्यासस्तर्कसङ्ग्रहः—दो अप्रकाशित टीकाओं तथा तर्कसङ्ग्रहका प्रामाणिक पाठ इस ग्रन्थमें सम्पादित किया गया है। (८) ईशोपनिषद्-भाष्य-कुसुमाञ्जली—ईशावास्योपनिषद् तथा इसपर शांकरभाष्यका मर्म पूरे वैदिक साहित्यकी पृष्ठभूमिको ध्यानमें रखते हुए अत्यन्त प्रामाणिक रूपसे सरल सुबोध शैलीमें उद्घाटित किया है। (९) श्रीशङ्कराचार्यचरितकुसुमाञ्जलि—उत्तरप्रदेश संस्कृत अकादमी द्वारा वर्षके सर्वश्रेष्ठ काव्यके रूपमें कालिदास पुरस्कारसे सम्मानित, डॉ० निगमबोधतीर्थके संस्कृत काव्यका सान्वय हिन्दी अनुवाद तथा सम्पादन। (१०) वैयाकरण सिद्धान्तकौमुदी ( भ्वादि ) भवतोषणी—पाणिनिसे भैरवमिश्रावधि आचार्यपरम्पराका समीक्षात्मक अध्ययन तथा धातुपाठका विवेचनात्मक अध्ययन ८२४ पृष्ठोंमें भ्वादिगणके सन्दर्भमें किया गया है। (११) पातञ्जलमहाभाष्य-प्रदीप-प्रकाश—महाभाष्य और कैयटकृत प्रदीपकी सानुवाद हिन्दी व्याख्यासहित विविध परिशिष्टोंसे युक्त प्रथम भाग यन्त्रस्थ है।