भारतकोश
काव्यमीमांसा (महाकवि राजशेखर - कवि-रहस्य एवं देश-विभाग सटीक)

काव्यमीमांसा (महाकवि राजशेखर - कवि-रहस्य एवं देश-विभाग सटीक)

Kavyamimamsa of Rajasekhara with Hindi Commentary

महाकवि राजशेखर / पं. केदारनाथ शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished381 पृष्ठ

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२६८ श्लोकः पृष्ठम् | श्लोकः पृष्ठम् इत्थं० ७८ | एतद्यत् ३५ इत्युक्तवानुक्तिविशेषरम्यं मनः ५८ | एताम् १९, ४५ इत्युक्तदानुक्तिविशेषरम्यं रामा० ५८ | एताः ४५, ८२ इत्युद्गते ६९ | एवम् ३८ इ्लेषः १० | कण्ठ० २३ इदं कविभ्यः ४१ | कथमसौ न ७५ इदं भासाम् ९७ | कथमगौ मदनो ७५ इदं महाहास० ५१ | कपाले ७२ इदं हि ५२ | कपोले ९७ इयं सा २ | करभाः १०७ इह ५५ | करोति ३३ उच्चैस्तराम् १८ | कर्कन्धूनाम् १०३, उच्यताम् ३२ | कर्कोटः ४३ उत्क्लेशम् ७१ | कर्णे १११ उत्खात० ८३ | कर्पूर० १०७ उत्पादकः ६२ | कलि० ३८ उदयति नवनीत० ७८ | कवित्वम् १५ उदयति पश्य ७४ | कवीनाम् ८२ उदरम् १८ | कवेः ५६ उदीच्य० १०४ | कश्चित् ९४ उद्दण्डोदर० ८४ | कस्त्वम् १४ उद्यानानाम् १०३ | काञ्च्याः ९६ उन्माद्यन्त्यम्बु० ४१ | कान्ते ६७ उपानयन्ती १०१ | कामं भवन्तु ८० उपोष० २८ | कामं विशृणुते ३२ उभौ ४१ | कारयित्री १५ उमैकपादा० ७२ | कार्या० ५१ उषस्सु ९९ | काव्यकाव्याङ्ग० १३ ऊरुद्वन्द्वम् ६१ | काव्यमध्यो २७ ऊरुद्वयम् ६१ | काव्येन १५ ऋतु० १११ | काश्मीरी० ९७ एकम् ९५ | काष्ठा ९८ एकद्वित्र्यादि ११२ | किं करोति ५७ एकस्य १३ | किं चैते ७८ एकोऽर्थः ४८ | किमिह ६० एणाः १०७ | किमीहः ३७ एतत्किम् १६ | कियता ६३ एतत्सुन्दरि ८५ | कियन्मात्रम् २४