भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

पृष्ठ 584, कुल 616 में से

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APPENDIX B XXVII ४५३ देवीभावं गमिता .वा० का० अ० सू० वृ०, IV. 2. 4; ह० र० आ०; श्री० का० प० 250; गो० का० प्र० P. 343. २०८ देशः सोऽयमरातिशोणित भ० वे० सं०, III. 33; म० व्य० वि०; गो० का० प्र० P. 205. २६ दैवादहमद्य तया रु० का० अ० VII. 29; गो० का० प्र० P. 64. ४३७ दोभ्यां तितीर्षति तरङ्ग श्री० का० प० 241; गो० का० प्र० P.336. १८६ द्वयं गतं संप्रति का० कु० सं० V. 71; कु० व० जी० I. 23; म०व्य० वि०, P. 40; श्री० का० प० 117; गो० का० प्र० P. 230. २५२ द्वयं गतं संप्रति " " " " २२ द्वारोपान्तनिरन्तरे गो० का० प्र० P. 54; सुरभा 304/6. ३९७ धन्यस्यानन्यसामान्य गो० का० प्र० P. 313. ६१ धन्यासि या कथयसि शा० प०; विज्जिका; श्री० का० प० 42; गो० का० प्र० P. 102. १८२ धम्मिल्लस्य न कस्य वा० का० अ० सू० वृ० II. 1.22; श्री० का० प०95; गो० का० प्र० P. 192. ५६४ धवलोसि जह वि हा० गा० स० 665,VII. 64; रु० अ० स० P. 96; गो० का० प्र० P. 383. ५३५ धातुः शिल्पातिशय गो० का० प्र० P. 376. २१० धीरो विनीतो निपुणो गो० का० प्र० P. 206. ४१४ न केवलं भाति नितान्त गो० का० प्र० P. 322. ९४ न चेह जीवितः कश्चित् श्री० का०प० 52; गो० का० प्र० P. 121. ५४९ न तज्जलं यन्न सुचारु भ० का०, II. 19; श्री० का० प० 309; गो० का० प्र० P. 381. १६७ न त्रस्तं यदि नाम भ० म० वी० च० II. 28; गो० का० प्र० P. 185. ५१३ नन्वाश्रयस्थितिरियं भ० श० 4; रु० अ० स० P. 85; गो० का० प्र० P. 366. ५७४ नयनानन्ददायीन्दोः क्षे० औ० वि० च०, P. 46; श्री० का० प० 320; गो० का० प्र० P. 392.

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