भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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APPENDIX B XXIX १०७ परिच्छेदातीतः भ० मां० मां० I. 30; गो० का० प्र० P. 123. ४८९ परिच्छेदातीतः भ० मां० मां० I. 30; गो० का० प्र० P. 356. ४०६ परिपन्थिमनोराज्य गो० का० प्र० P. 316. २८ परिमृदितमृणालीम्लान भ० मां० मा० I. 22; गो० का० प्र० P. 72. ३४९ परिम्लानं पीनस्तनजघन का० र० व०.II. 12; गो० का० प्र० P. 284. ३२६ परिहरति रतिं मति गो० का० प्र० P: 264. ९० पविसंती घरवारं हा० गा० स० 880; गो० का० प्र० P. 119. ४९२ पश्चादङ्घ्री प्रसार्य बा० ह० च०, III. 5; गो० का० प्र० P. 356. १२३ पश्येत्कश्चिच्चलचपल गो० का० प्र० P. 138 ३३२ पाण्डु क्षामं वदनं अ० ध्व० आ० लो० P. 166; श्री० का० प० 254; गो० का० प्र० P. 238. ४६० पाण्डु क्षामं वदनं अ० ध्व० आ० लो० P.166; श्री० का० प० 254; गो० का० प्र० P. 238; गो० का० प्र० P. 346. ५८७ पातालमिव ते नाभिः वा० का० अ० सू० वृ० IV.2. 11; श्री० का० प० 330; गो० का० प्र० P. 397. ५७८ पादाम्बुजं भवतु नो पञ्चस्तवी III. 1. १७७ पितृवसतिमहं व्रजामि श्री० का० प० 83; गो० का० प्र० P. 140. ५४८ पुराणि यस्यां सवराङ्गनानि प० न० सा० च० I.22; रु० अ० स० P. 81; श्री० का० प० 308; गो० का० प्र० P. 381. ४४३ पुंस्त्वादपि प्रविचलेत् भ० श० 79; गो० का० प्र० P. 339. ३०६ पृथुकार्तस्वरपात्रं सु० र० को० No. 1644; गो० का० प्र० P. 257. ३७० ,, ,, गो० का० प्र० P. 294.

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