भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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APPENDIX B XXXI ९८ प्रेयान् सोऽप्यमप्राकृत - वा० का० अ० सू० वृ० III. 2. 15; श्री० का० प० 56; गो० का० प्र० P. 122. ३५१ प्रौढ़च्छेदानुरुपोच्छलन छलितरामम्; गो० का० प्र० P. 285. ३०९ फुल्लुवक्करं कलमंकूरणिहं रा० क० म०, I. 19; गो० का० प्र० P. 258. ४३१ बत सखि कियदेतत् गो० का० प्र० P. 333. ११९ बन्दीकृत्य नृप द्विषां सुरभा 112/268. ५१४ बिम्बोष्ठ एव रागस्ते प० न० सा० च० VI. 60; गो० का० प्र० P. 367. १३० ब्राह्मणातिक्रमत्यागो गो० का० प्र० P.143; भ० म० वी० च० II. 8; श्री० का० प० 71. ३७१ भक्तिप्रह्वविलोकन भागवतामृतवर्धनः; व० सु० आ०; म० व्य० वि० II. 92. p. 362 (P. 421 Chow-); गो० का० प्र० P. 295. ५२४ भक्तिर्भवे न विभवे रु० अ० स० P. 87; गो० का० प्र० P. 271. ५८१ भण तरुणि रमण कु० व० जी० I. 9; II.20; रु० का० अ० II. 22; गो० का० प्र० P. 396. १२ भद्रात्मनो दुरधिरोह शि० क० अ० I.38; श्री० का० प० 1; गो० का० प्र० P.46. १३८ भम धम्मिअ वीसद्धो हा० गा० स० 175 (II.75.) म० व्य० वि० P. 400; श्री० का० प० 2; गो० का० प्र० P. 164. ५०३ भस्मोद्धूलन भद्रमस्तु गो० का० प्र० P. 361. ३८७ भासते प्रतिभासार रु० अ० स० P. 20; श्री० का० प० 205; गो० का० प्र० P. 305. ७८ भुवितमुवितकृदेकान्त गो० का० प्र० P. 113. ५८३ भुजङ्गमस्येव मणिः गो० का० प्र० P. 397. १७५ भूपतेरुपसर्पन्ती गो० का० प्र० P. 189. २६० भूपालरत्न निर्दैन्य श्री० का० प० 126; गो० का० प्र० P. 236.