भारतकोश
काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

काव्यप्रकाश (आचार्य मम्मट - सम्पूर्ण १० उल्लास सटीक)

Kavyaprakasha of Mammata with Hindi Commentary

आचार्य मम्मट / पं. विश्वेश्वर सिद्धान्तशिरोमणि द्वारा

DevanagariSanskritpublished616 पृष्ठ

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APPENDIX B XLIII १६५ सुधाकरकराकर श्री० का० प० 90; गो० का० प्र० P. 185; शा० प० 1102; सु० र० भा० 218/67. १७८ सुरालयोल्लासपरः गो० का० प्र० P.190. ११ सुव्वइ समागसिस्सदि हा० गा० स० 962; गो० का० प्र० P.53. २६६ सुसितवसनालंकारायां श्री० का० प० 121; गो० का० प्र० P. 239; सु० र० भा० 136/38. ४७९ सुसिवसनातलंकारायां ” ” ” ४४२ सुहृद्वधूबाष्पजल उ० का० अ० सा० सं० उ० वि० P. 43; गो० का० प्र० P. 338. ४८५ सृजति च जगदिदमवति गो० का० प्र० P. 355; सु० र० भा० 91/45. २५ सेयं ममाङ्गेषु सुधारस शंकुक; गो० का० प्र० P. 64; सु० र० भा० 273/6. ५६१ सो णत्थि एत्थ गामे हा० गा० स० 997; गो० का० प्र० P. 389. १७० सोऽध्यैष्ट वेदान् भ० का० I. 2; गो० का० प्र० P. 187. ४४८ सोऽपूर्वो रसनाविपर्यय भ० श० 18; गो० का० प्र० P. 341; सु० र० भा० 224/110. ८७ सो सुद्धसामलंगो हा० गा० स० 998; आ० वि० बा० ली०; गो० का० प्र० P. 118. २९१ सौन्दर्यसंपत् तारुण्यं गो० का० प्र० P. 250. ४२४ सौन्दर्यस्य तरङ्गिणी गो० का० प्र० P. 329. ५७५ सौभाग्यं वितनोति श्री० का० प० 321. ४८ स्तुमः कं वामाक्षि श्री० का० प० 33; गो० का० प्र० P. 93; सु० र० भा० 313/64. ३७८ स्तोकेनोन्नतिमायाति श्री० का० प० 202; गो० का० प्र० P. 299. प० तं० I. 161; सु० र० भा० 54/23. ११२ स्निग्धश्यामलकन्ति आ० ध्व० आ० II; गो० का० प्र० P.131; ध्व० आ० लो० II. 1, PP. 61-62;

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