भारतकोश
खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)

Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary

महाकवि श्रीहर्ष द्वारा

DevanagariHindipublished610 पृष्ठ

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२२ सानुवाद खण्डनखण्डखाद्य [ प्रथम अथ सत्ता न कारणकोटिनिविष्टा, किन्तु कारणत्वं सत्त्वम्, नियतपूर्वसत्ता हि कारणतां मन्ये इति मन्यसे; तर्हि मत्पक्षेऽपि सैव कारणताऽस्तु । तर्हि कारणस्य सत्तामभ्युपगतवानसीति घट्टकुट्यां प्रभातमिति चेन्न । भावानवबोधात् । सत्तामसतीमभ्युपगच्छताऽपि सत्ता मयाऽभ्युपगतैव । अन्यथा काऽसौ असतीति । त्वमपि किं सत्तां तत्सत्तामन्तर्भाव्य कारणत्वमिच्छसि ? न त्वेवम्; पूर्ववत् क्वापि सत्तात्यागो वा अनवस्थायां वा पर्यवसानं स्यात् । असत्त्वाविशेषात् कारणनियमः कथं स्यादिति चेन्न । सत्त्वाविशेषेऽपि तुल्यत्वात् । समर्थन—सत्ता कारणता में उपलक्षणत्व या विशेषणत्व से प्रविष्ट नहीं है। कारणत्व ही सत्त्व है, क्योंकि नियत-पूर्व-सत्त्व को ही कारण मानते हैं। खण्डन —यदि ऐसा मानते हैं, तब हमारे मत में भी नियत-पूर्व-सत्त्व ही कारणत्व है। समर्थन—तब आपने कारण की सत्ता मान ली, इससे घट्ट-कुटी में प्रभात हुआ। अर्थात् राज-कर के भय से छिपे मनुष्य का दैववश तहसील में प्रभात होने से जैसी गति होती है, वसी ही आपकी गति हुई । सद्वाद खंडन—आपने मेरे भाव को नहीं जाना। सत्ता को असती मानने पर भी मैं उसे मानता ही हूँ। यदि सत्ता को न मानूँ, तो असत् किसे कहूँगा ? आप भी 'नियतपूर्व-सत्त्वरूप कारणत्व' में अन्य सत्ता को मानते हैं या नहीं ? यदि नहीं, तो असत् ही कारण हुआ ।. यदि मानते हैं, तो उस द्वितीय सत्ता को कारणत्व-दल में प्रविष्ट कर कारण मानते हैं या प्रवेश न कर ? यदि प्रवेश न कर, तो असत् ही कारण रहा। यदि प्रवेश कर, तो सत्ता में सत्ता और उसमें अन्य सत्ता, इस रीति से अनवस्था हो जायगी । यदि किसी सत्ता में सत्ता न मानें, तो जड़ ( मूल-कारण ) तक सब असत् ( सत्तारहित या मिथ्या ) ही हो जायगा । शङ्का—यदि कारण असत् है, तो असत्त्व में कोई अन्तर नहीं है। फिर 'घट का दण्ड कारण है, रासभ नहीं' यह नियम कैसे होगा ? समाधान—यदि कारण सत् हो, तब भी सत्त्व में कोई विशेषता नहीं रहती । दण्ड, रासभ सबकी सत्ता एक सी ही है। फिर तुम्हारे मत में भी 'दण्ड कारण है और रासभ नहीं' यह नियम कैसे होगा ?