खण्डनखण्डखाद्यम् (महाकवि श्रीहर्ष - अद्वैत न्याय-खण्डन एवं तत्त्व-निर्णय सटीक)
Khandanakhandakhadya of Mahakavi Sriharsha with Commentary
महाकवि श्रीहर्ष द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिच्छेद ] अद्वैत में प्रमाण-विचार ४६
यदि च का प्रमाणव्यक्तिरसौ इति प्रश्नार्थः परिशिष्यते, तदा न सर्वा व्यक्तिर्विशेषतो निर्देष्टुं शक्यते इति तदनिर्देशेऽपि न नः किञ्चिदपचीयते । यदि च द्वितीयः, तदानीमद्वैतप्रतीतिमप्रमां मन्यमानस्य तव 'अप्रमाविषये किं प्रमाणम्' इति कथं न प्रश्नो व्याहन्यते ? अथ अप्रमा सा मम मते, त्वन्मते तु प्रमैवेति तत्करणं प्रमाणं पृच्छयते इति ब्रूषे; नैतदप्युपपद्यते, तवाऽद्वैते ज्ञानं यदुत्पद्यते तत्करणं मया प्रमाणरूपं वक्तव्यमित्यत्र ममाऽनियमात् । यदि नाम मया सदाऽद्वैतमभ्युपेयते, तावता किं तावकीनस्य तज्ज्ञानस्य करणमवश्यं प्रमाणं स्यात् ? वस्तुतो वह्निमत्यपि पर्वते यदि कश्चिद्वाष्पं धूमं प्रतीत्य ततो वह्निमनुमिनोत्येतावता किंबाष्पविषयं धूम- ज्ञानं करणं प्रमाणमेष्टव्यमिति ? अस्तु वा प्रश्नोऽयं यथा तथा, श्रुतिरेवाद्वैते प्रमाणमिति ब्रूमः । श्रूयते खलु 'एकमेवाद्वितीयम्', 'नेह नानास्ति किंचन' इत्यादि । श्रुतिप्रामाण्यं सिद्धार्थ- प्रश्न-समर्थन—अनुमानत्वरूप विशेष भी सामान्य ही है, अतः अद्वैत में कौन-सी अनुमान व्यक्ति प्रमाण है ?, यह प्रश्न का आशय है । प्रश्न-खंडन—सम्पूर्ण प्रमाण- व्यक्तियों का विशेष रूप से कोई भी निर्देश नहीं कर सकता, तब हम भी उसका निर्देश न कर सकें, तो हमारी हानि क्या है ? यदि आपकी अद्वैत-प्रतीति अप्रमा हो, तो प्रश्न का आशय यह हुआ कि 'अप्रमा के विषय अद्वैत में प्रमाण क्या है।' किन्तु यह प्रश्न बाधित है, क्योंकि जो अप्रमा का विषय है, वह प्रमा का विषय कैसे होगा ? समर्थन—हमारे मत में अद्वैत-ज्ञान अप्रमा है, पर आपके मत में वह सब प्रमा ही है । अतः उसके कारणरूप प्रमाण के प्रश्न में व्याघात देना ठीक नहीं है । खण्डन—'तुम्हें अद्वैतविषयक जो ज्ञान हुआ है, उसका प्रमाणरूप करण हमें कहना चाहिए', इसमें मेरी नियुक्ति नहीं हो सकती । हम सदा अद्वैत मानते हैं, क्या इतने मात्र से तुम्हारे अद्वैत के ज्ञान का करण अवश्य प्रमाण होगा ? (कदापि नहीं) । वस्तुतः वह्निमान् भी पर्वत में यदि कोई बाष्प या धूलि-पटल को धूम जानकर उससे वह्नि का अनुमान करे, तो वह्नि-ज्ञान के प्रमा होने पर भी क्या बाष्प का धूमरूप से ज्ञान उसका (वह्नि-ज्ञान का) करण प्रमाण माना जायगा ? प्रश्न का उत्तर—मान लें कि जिस किसी प्रकार 'अद्वैत में क्या प्रमाण है' यह प्रश्न