किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)

किरातार्जुनीयम् (घण्टापथ व सुधा टीका सहित)
Kiratarjuniyam of Bharavi Hindi
महाकवि भारवि द्वारा
स्रोत: Kiratarjuniyam with Ghantapath & Sudha Hindi Commentary by Sheshraj Sharma (उद्गम)
DevanagariHindipublished707 पृष्ठ
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४४८ किराताजुंनीयम्
| स० | श्लो० | स० | श्लो० | ||
|---|---|---|---|---|---|
| हरपृथासुतयो | १८ | २ | हृतोत्तरीयां प्रसभं | ११ | ४१ |
| हरसैनिकाः प्रतिभये | १२ | ४८ | ह्रदाम्भसि व्यस्तवधू | ८ | ४३ |
| हरिन्मणीयाममुदग्र | १४ | ४१ | ह्रीतया गलितनीवि | ९ | ४८ |
| हंसा बुहन्तः सुरसद्म | १८ | १९ | ह्रेपयन्नहिमतेजसं | १३ | १५ |
| हता गुणैरस्य भयेन | १४ | ६१ |