कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)
Kularnava Tantra with Hindi Commentary
भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२० हिन्दी कुलार्णव प्रदायै सप्तकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः नेत्रयोः। छं जं झं अष्टलक्ष- कोटिभेदबटुकाद्यष्टाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै अष्टकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः आज्ञायाम्। ञं टं ठं नवलक्षकोटिभेदब्रह्मादिनवाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधि- देवतायै सकलफलप्रदायै नवकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः इन्दौ। डं ढं णं दशलक्षकोटिभेदविष्ण्वादिदशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै दशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः बिन्दौ। तं थं दं एकादशलक्षकोटिभेदरुद्राद्येकादशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै एकादशकूटेश्वर्यम्बा- देव्यै नमः कलायां। धं नं पं द्वादशलक्षकोटिभेदसारस्वत्यादि- द्वादशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै द्वादशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः उन्मन्याम्। फं बं भं त्रयोदश- लक्षकोटिभेदलक्ष्यादित्रयोदशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधि- देवतायै सकलफलप्रदायै त्रयोदशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः शिरो- वृत्ते। मं यं रं चतुर्दशलक्षकोटिभेदगौर्यादिचतुर्दशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै चतुर्दशकूटेश्वर्य- म्बादेव्यै नमः नादे। लं वं शं षं पञ्चदशलक्षकोटिभेददुर्गादि- पञ्चदशाक्षरात्मिकायै नमः सकलफलप्रदायै पञ्चदशकूटेश्वर्यम्बा- देव्यै नमः नादांते। सं हं ळं क्षं षोडशलक्षकोटिभेदत्रिपुरादि- षोडशाक्षरात्मिकायै नमः सकलमन्त्राधिदेवतायै सकलफलप्रदायै षोडशकूटेश्वर्यम्बादेव्यै नमः ब्रह्मरन्ध्रे। अं...क्षं सर्वमन्त्रात्मिकायै पराम्बादेव्यै नमः सर्वाङ्गे व्यापकं। दैवतन्यास पूर्ववत् निम्न मन्त्रों के आदि में 'ऐं ह्रीं श्रीं ह्सौः' जोड़ ले— अं आं सहस्रकोटिऋषिकुलसेवितायै निवृत्त्यम्बादेव्यै नमः