भारतकोश
कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

कुलार्णव तन्त्र (हिन्दी व्याख्या सहित)

Kularnava Tantra with Hindi Commentary

भगवान शिव / पं. भद्रशील शर्मा द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished84 पृष्ठ

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साधनमाला ५१ के दिन तक पूजा करे । अमावास्या के दिन भक्ति-पूर्वक कुलशक्तियों का पूजन करे । ऐसा करने से साधक देवता का प्रीतिपात्र होता है और सब प्रकार के ऐश्वर्य से युक्त होकर सबसे सम्मानित होता है । आगमोक्त विधि से विशेष दिवसों में जो पूजन करता है, वह हम दोनों का प्रियपात्र होता है और सद्गति को प्राप्त करता है । अतः प्रयत्नपूर्वक सब दशाओं में कुलपूजा करनी चाहिये क्योंकि कुलपूजा से अभीष्ट फल मिलता है । विशेष दिवसों में साधकों को देखकर सभी लोग हर्षित होते हैं और सोचते हैं कि क्या ही अच्छा होता, यदि वे स्वयं भी पूजा कर सकते । इसलिये चाहे अपने कल्याण के लिये या दूसरे के हित के लिए पवित्र द्रव्यों से युक्त होकर चक्रपूजा-पूर्वक विशेष दिवसों का अर्चन किया करे । इस प्रकार हे कुलेशानि ! विशेष दिवसों का कुछ अर्चन-विधान मैंने संक्षेप में कहा । अब तुम क्या सुनना चाहती हो ?