भारतकोश
कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कुमारसम्भवम् (महाकवि कालिदास - संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kumarasambhavam of Kalidasa with Hindi Commentary

महाकवि कालिदास / पं. सीताराम चतुर्वेदी द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

पृष्ठ 195, कुल 268 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 195

( १७८ ) as a bracelet, i.e decked with snakes , girdled with a serpent as with a bracelet Shiva wears Vâsuki round his wrist as a bracelet वलय—a bracelet ‘आवापकः पारिहार्य्यं कटको वलयोऽस्त्रियाम्’ इत्यमरः । For the formation of वलयीकृत with च्विः see notes on मुकुलीकृत in verse 63 तत्प्रथमावलम्बनम्—तदेव प्रथमं तत्प्रथमम् ; तत्प्रथमं च तदवलम्बनं (तत् ग्रहणं) तत्प्रथमावलम्बनम् the first clasp कथं नु सहिष्यते—how will it bear ? i e., it will not be able to hear Cf ‘तस्योद्वाहनकाले च हा हा कर्त्तुं भविष्यति । फणिकंकणसंयोगं यदा ते कंकणं भवेत् ।' शिवपुराणम् ॥ ६६ ॥ Change of Voice .—( हे ) अवस्तुनिर्बन्धपरे ' आमुक्त- विवाहकौतुकेन अनेन ते करेण शंभो वलयीकृताहिना करेण तत्प्रथमावलम्बनं कथं नु सहिष्यते ॥ ६६ ॥ Hindi Translation :—हे तुच्छ वस्तु के पीछे पड़ी हुई (पार्वति) ! विवाह के धागे (कल्लावे) से युक्त यह तेरा हाथ, जिसमें सांप कड़े की तरह पहना हुआ है ऐसे शिव के हाथ से पहिले पहिल पकड़ने को किस प्रकार सहन कर सकेगा ? ॥ ६६ ॥ English Translation —O one who is intent on an unworthy object, how will this thy hand, with the marriage-string tied round it, bear the first clasp of Shambhu's hand girdled with a serpent as with a bracelet ? 66 Purport in Sanskrit :—हे तुच्छपदार्थे आग्रहवति पार्वति ! अशुभवस्तुधारी शिवः स्वहस्ते सर्पं कङ्कणात्वेन धारयति,