संक्षिप्त कूर्मपुराण

संक्षिप्त कूर्मपुराण
Kurma Purana
महर्षि वेदव्यास द्वारा
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॥ श्रीहरिः ॥
विषय-सूची
( पूर्वविभाग )
| अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या | अध्याय | विषय | पृष्ठ-संख्या |
|---|---|---|---|---|---|
| १- | सूतजीकी उत्पत्ति, उनके रोमहर्षण नाम पड़नेका कारण, पुराणों तथा उपपुराणोंका नाम-परिगणन, समुद्र-मन्थनसे उत्पन्न विष्णुमायाका वर्णन, इन्द्रद्युम्नका आख्यान और कूर्मपुराणकी महिमा .................... | ११ | उनका विवाह, धर्म तथा अधर्मकी संतानोंका विवरण ............................. | ५० | |
| २- | विष्णुके नाभिकमलसे ब्रह्माका प्रादुर्भाव, रुद्र तथा लक्ष्मीका प्राकट्य, ब्रह्माद्वारा नौ मानस पुत्रों तथा चार वर्णोंकी सृष्टि, वेदज्ञानकी महिमा, ब्रह्म-सृष्टिका वर्णन, वर्ण और आश्रमोंके सामान्य तथा विशेष धर्म, गृहस्थाश्रमका माहात्म्य, चतुर्विध पुरुषार्थोंमें धर्मकी महिमा, आश्रमोंका द्वैविध्य, त्रिदेवोंका पूजन, त्रिपुण्ड्र, तिलक तथा भस्म-धारणकी महिमा ....... | २२ | ९- | शेषशायी नारायणकी नाभिसे कमलकी उत्पत्ति तथा उसी कमलसे ब्रह्माका प्राकट्य, विष्णुमायाद्वारा ब्रह्माका मोहित होकर विष्णुसे विवाद करना, भगवान् शंकरका प्राकट्य, विष्णुद्वारा ब्रह्माको शिवका माहात्म्य बताना, ब्रह्माद्वारा शिवकी स्तुति तथा शिव और विष्णुके एकत्वका प्रतिपादन ................. | ५२ |
| ३- | आश्रमधर्मका वर्णन, संन्यास ग्रहण करनेका क्रम, ब्रह्मार्पणका लक्षण तथा निष्काम-कर्मयोगकी महिमा ............................. | ३२ | १०- | विष्णुद्वारा मधु तथा कैटभका वध, नाभिकमलसे ब्रह्माकी उत्पत्ति तथा उनके द्वारा सनकादिकी सृष्टि, ब्रह्मासे रुद्रकी उत्पत्ति, रुद्रकी अष्टमूर्तियों, आठ नामों तथा आठ पत्नियोंका वर्णन, रुद्रके द्वारा अनेक रुद्रोंकी उत्पत्ति तथा पुनः वैराग्य ग्रहण करना, ब्रह्माद्वारा रुद्रकी स्तुति तथा माहात्म्य-वर्णन, रुद्रद्वारा ब्रह्माको ज्ञानकी प्राप्ति, महादेवका त्रिमूर्तित्व और ब्रह्माद्वारा अनेक प्रकारकी सृष्टि ................................. | ५९ |
| ४- | सांख्य-सिद्धान्तके अनुसार ब्रह्माण्डकी सृष्टिका क्रम, पञ्चीकरण-प्रक्रिया तथा परमेश्वरके विविध नामोंका निरूपण .................... | ३४ | |||
| ५- | ब्रह्माजीकी आयुका वर्णन, युग, मन्वन्तर तथा कल्प आदि कालकी गणना, प्राकृत प्रलय तथा कालकी महिमाका वर्णन ... | ४० | ११- | सती और पार्वतीका आविर्भाव, देवी-माहात्म्य, हैमवती-माहात्म्य, देवीका अष्टोत्तरसहस्रनाम-स्तोत्र, हिमवान्द्वारा देवीकी स्तुति एवं हिमवान्को देवीद्वारा उपदेश, देवीसहस्रनाम-स्तोत्र-जपका माहात्म्य ....................... | ६६ |
| ६- | 'नारायण' नामका निर्वचन, वराहरूपधारी नारायणद्वारा पृथ्वीका उद्धार, सनकादि ऋषियोंद्वारा वराहकी स्तुति .................... | ४२ | १२- | महर्षि भृगु, मरीचि, पुलस्त्य तथा अत्रि आदिद्वारा दक्ष-कन्याओंसे उत्पन्न संतान-परम्पराका वर्णन, उनचास अग्नियों, पितरों तथा गङ्गाके प्रादुर्भावका वर्णन ............. | ८९ |
| ७- | नौ प्रकारकी सृष्टि, ब्रह्माजीके मानस पुत्रोंका आविर्भाव, ब्रह्माजीके चारों मुखोंसे चारों वेदोंकी उत्पत्ति इत्यादिका वर्णन ........ | ४४ | १३- | स्वायम्भुव मनुके वंशका वर्णन, चाक्षुष मनुकी उत्पत्ति, महाराज पृथुका आख्यान, पृथुका वंश-वर्णन, पृथुके पौत्र 'सुशील'का रोचक | |
| ८- | सृष्टि-वर्णनमें ब्रह्माजीसे मनु और शतरूपाका प्रादुर्भाव, स्वायम्भुव मनुके वंशका वर्णन, दक्ष प्रजापतिकी कन्याओंका वर्णन तथा |