भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( १०६ ) लीलावती । कृत्यादियोगे करणसूत्रं वृत्तम्- एक आदि क्रमसे अंकोंके वर्गोंको तथा घन आदिको जोडनेकी सरल रीति एक श्लोकमें- द्विघ्नपदं कुयुतं त्रिविभक्तं सङ्कलितेन हतं कृतियोगः ॥ सङ्कलितस्य कृतेः सममेकाद्ये कघनै क्यमुदीरितमाद्यैः ॥ ३४ ॥ अन्वयः-द्विघ्नपदं कुयुतं त्रिविभक्तं संकलितेन हतं कृतियोगः स्यात् । सङ्कलितस्य कृतेः समम् आद्यैः एकाद्यङ्कघनै क्यम् उदीरितम् ॥ ३४ ॥ अर्थः-पदको दूना कर एक जोडनेसे जो अंक हो उसमें तीनका भाग देनेसे जो अङ्क मिले उससे पदतकके संकलितको गुणा करे तब एक आदि अङ्कोंके घनोंका जोड होगा ॥ ३४ ॥ उदाहरणम्- तेषामेव च वर्गैक्यं घनैक्यं च वद् द्रुतम् ॥ कृतिसंकलनामार्गे नाकुला यदि ते मतिः ॥ १॥ अन्वयः-तेषाम् एव वर्गैक्यं घनैक्यं च द्रुतं वद? यदि कृतिसंकलनामार्गे ते मतिः आकुला न अस्ति ॥ १ ॥ अर्थः- तिनहीं एकसे लेकर नौतक अंकोंके वर्गके जोडको तथा घनोंके जोडको शीघ्र कहो ? यदि तुम्हारी बुद्धि जोडनेमें व्याकुल न हो तो ॥ १ ॥ न्यासः- १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ वर्गैक्यम् १ ५ १४ ३० ५५ ९१ १४० २०४ २८५ घनैक्यम् १, ९, ३६, १००, २२५, ४४१, ७८४, १२९६, २०२५ फैलाव-इनका वर्ग तो परिकर्म्माष्टकमें कही हुई रीतिसे जानना फिर ऊपर कही हुई रीति के अनुसार वर्गोंका जोड मिलेगा, जैसा कि, यहां नौतकको वर्गका जोड जानना है. इस कारण उपरोक्त रीति के अनुसार पद नौको दूना किया तब अठारह हुए, इसमें एक जोड दिया तब १९ उन्नीस हुए, इनमें ३ तीनका भाग लिया तब १९/३ हुए इससे पदके सङ्कलित ४५ को गुणा किया तब २८५ दोसौ पचासी हुए यही एकसे लेकर ९ नौतकके अङ्कोंके वर्गका जोड हुआ ॥ अब उन्हीं अङ्कोंका घनयोग करना है, इस कारण ऊपर कहीहुई रीति के अनुसार पद ९ नौके संकलन ४५ पैंतालीसका वर्ग किया तब २०२५ दोहजार पचीस हुए CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri