भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ३४ ) लीलावती ।

अथ भिन्नसंकलितव्यवकलितयोः करणसूत्रं वृत्तार्द्धम्- अब भिन्न जोड तथा घटाव करनेकी रीति आधे श्लोकमें- योगोऽन्तरं तुल्यहरांशकानां कल्प्यो हरो रूपमहारराशेः ॥ अन्वयः-तुल्यहरांशकानां योगः कार्य्यः । तथा अन्तरं कार्य्यम् । अहारराशेः रूपं हरः कल्प्यः । अर्थः-भिन्न राशियोंका समच्छेद करके जोडे अथवा घटाव करे और जिस राशिके नीचे हर न हो उसका एक १ के अंकको हर कल्पना कर लेना चाहिये ॥ अत्रोद्देशकः- भिन्न संकलन तथा व्यवकलनके विषयमें उदाहरण. पञ्चांशपादत्रिलवार्द्धषष्ठानेकीकृतान्ब्रूहि सखे ममैतान् ॥ एभिश्च भागैरथ वर्जितानां किं स्यात्त्रयाणां कथयाशु शेषम् ५ ॥ अन्वयः-हे सखे ! पञ्चांशपादत्रिलवार्द्धषष्ठान् एतान् एकीकृतान् मम ब्रूहि । अथ एभिः भागैः वर्जितानां त्रयाणां च शेषं किं स्यात् इति आशु कथय ॥ ५ ॥ अर्थः-हे मित्र ! पञ्चमांश १/५ चतुर्थांश १/४ तृतीयांश १/३ आधा १/२ और षष्ठांश १/६ इनका योग (जोड) करके कहो और इन भागों करके वर्जित तीन ३ का शेष क्या होगा ? सो शीघ्र हमसे कहो ॥ ५ ॥ न्यासः-१/५ १/४ १/३ १/२ १/६ ऐक्ये जातम् २९/२० फैलाव- १/५ १/४ १/३ १/२ १/६ इनका उपरोक्त रीतिके अनुसार पहले समच्छेद किया अर्थात् पहली राशिके ह ५ पांचसे अपने हर और अंशको छोडकर और सब राशियोंके हर अंशोंको गुणा किया तब १/५ ५/२० ५/१५ ५/१० ५/३० ऐसा रूप हुआ. फिर दूसरी राशिके हर ४ चारसे अपने हर और अंशको छोडकर अन्य राशियोंके हर और अंशोंको गुणा किया तब ४/२० ५/२० २०/६० २०/४० २०/१२० ऐसा रूप हुआ. फिर तीसरी राशिके हर ३ तीनसे पूर्वोक्त रीतिके अनुसार हर और अंशोंको गुणा किया तब १२/६० १५/६० ६०/१८० ६०/१२० ६०/३६० ऐसा हुआ. फिर चौथी राशिके हर २ से पूर्वोक्त रीतिके अनुसार अन्यराशियोंके हर और अंशोंको गुणा किया तब २४/१२०