भारतकोश
लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

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( ४२ ) लीलावती । तन्मूलेऽष्टयुते हतेऽपि दशभिर्जातं द्वयं ब्रूहि तं राशिं वेत्सि हि चञ्चलाक्षि विमलां बाले विलोमक्रियाम् ॥१०॥ अन्वयः-हे बाले ! चञ्चलाक्षि ! चेत् विमलां विलोमक्रियां वेत्सि तर्हि यः राशिः त्रिघ्नः त्रिभिः स्वचरणैः अन्वितः ततः सप्तभिः भक्तः स्वत्र्यंशेन विवर्जितः स्वगुणितः द्विपञ्चाशता हीनः तन्मूले अष्टयुते दशभिः हृते अपि द्वयं जातम् । तं राशिं ब्रूहि ॥ १० ॥ अर्थः-हे सोलह वर्षकी उमर वाली ! चञ्चल नेत्रोवाली ! यदि तुम शुद्ध विलो- मकी रीति जानती हो तो जिस राशिको तीन ३ से गुणा किया फिर अपने तीन चरणोंसे युक्त किया तदनन्तर ७ सातका भाग दिया तब जो राशि हुआ उसका तृतीयांश १/३ उसमें घटाया फिर जो राशि हुआ उसका वर्ग करके उसमें ५२ बावन घटाया तब जो शेष रहा उसका मूल लेकर आठ ८ जोड दिये. तदनन्तर दशका १० भाग देनेपर भी दो २ लब्धि होता है तो कहो वह कौन राशि है ? कि जिसम पूर्वोक्त विधि करनेपर भी दो २ लब्धि होता है ॥ १० ॥ न्यासः--गुणः ३ क्षेपः ३/४ । भाजकः ७ । ऋणम् १/३ वर्गम्-ऋणम् ५२ मूलम्-क्षेपः ८ हरः १० । दृश्यम् २ यथोक्तकरणेन जातो राशिः २८ ॥ इति व्यस्तविधिः। फैलाव-यहां दृश्य राशि २ दो है उसको दशसे गुणा किया तब २० बीस हुआ. उसमें आठ ८ घटाये तब १२ | दृश्य बारह शेष रहे. उनका वर्ग किया तब १४४ एक | २ (आलाप) (कल्पना) सौ चौवालीस हुए. उनमें बावन ५२ जोडे तब | गुणक ३ भाजक १९६ एकसौ छियानवे हुए. इनका मूल लिया | युक्त ३/४ अन्तर तब १४ चौदह हुए. इसमें अपना तृतीयांश | भाजक ७ गुणक युक्त करना है इस कारण अंश १ एकको हर ३ | अन्तर १/३ युक्त तीनमें घटाया तब दो रहा. इनका १४ चौदह | वर्ग — मूल में भाग लिया तब ७ सात लब्धि हुआ. यह १४ | अन्तर ५२ युक्त चौदहमें जोड दिये तब २१ इक्कीस हुए. इनको ७ | मूल — वर्ग सातसे गुणा किया तब १४७ एकसौ सैंतालीस | युक्त ८ अन्तर हुए. अब इस राशिका त्रिगुणित चतुर्थांश अपनेमें | भाजक १० गुणक CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri

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