लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७६ ) लीलावती । राशीनां $\frac{२६}{५}\ \frac{१२५}{२}\ \frac{१६}{५}$ वधः $\frac{५२०००}{५०}$ अल्पराश्योः $\frac{५}{३}\ \frac{१००}{१}$ वधः $\frac{५००}{३}$ भागार्थं विपर्य्ययेण न्यासः- $\frac{५२०००}{५०}\ \frac{३}{४००}$ अंशाहतिः १५६००० छेदवधः २०००० अनेन भक्तं जातम् ७$\frac{४}{५}$ छेदघ्नरूपे कृते जातं कलान्तरमिदम् $\frac{३९}{५}$ एवं सर्वत्र ज्ञेयं धीमता ॥ अथवा इसी उदाहरणका दूसरी तरहसे फैलाव. प्रश्न करनेवालेके कहनेके अनुसार न्यास १$\frac{२}{३}\ \frac{?}{१००}\ ५\frac{१}{५}\ ३\frac{१}{५}\ ६२\frac{१}{२}$ ऐसा है, इसका भागानुबन्ध करके ऐसा $\frac{५}{३}\ \frac{१००}{१}\ \frac{२६}{५}\ \frac{१६}{५}\ \frac{१२५}{२}$ होता है तब फलका पलटा करनेसे एक पंक्तिमें राशि हुई $\frac{५}{३}\ \frac{१००}{१}$ यह दोनों और दूसरी पंक्तिमें यह $\frac{२६}{५}\ \frac{१२५}{२}\ \frac{१६}{५}$ राशि हुई. अब उपरोक्त सूत्रानुसार अधिक राशिके अंश और हरका घात करनेस $\frac{५२०००}{५०}$ ऐसा रूप हुआ. इसमें थोडी राशिके अंश और हरोंके घात $\frac{४००}{३}$ का भाग लेनेके वास्ते पलट कर न्यास किया तब $\frac{५२०००}{५०}\ \frac{३}{४००}$ ऐसा रूप हुआ. अब अंशोंका परस्पर घात किया तब १५६००० यह राशि हुआ और हरोंका परस्पर घात किया तब २०००० यह राशि हुआ और अंशघातमें हरघातका भाग दिया तब ७ सात लब्धि हुआ और $\frac{४}{५}$ यह भिन्नांक बचा. यहाँ भागानुबन्ध किया तब ब्याज यह $\frac{३९}{५}$ हुआ. पहली रीतिसे भी यही उत्तर आया था. इसी प्रकार बुद्धिशालीको सर्वत्र जानना चाहिये. अथ सप्तराशिकोदाहरणम्-- अब सप्तराशिका उदाहरण लिखते हैं:- विस्तारे त्रिकराः कराष्टकमिता दैर्घ्ये विचित्राश्च चे-- द्रूपैरूत्कटपट्टसूत्रपटिका अष्टौ लभन्ते शतम् ॥ दैर्घ्ये सार्द्धकरत्रयाऽपरपटी हस्तार्द्धविस्तारिणी तादृक् किं लभते द्रुतं वद वणिग्वाणिज्यकं वेत्सि चेत् ॥ ३ ॥ अन्वयः-हे वणिक् ! चेत् वाणिज्यं वेत्सि तर्हि चेत् विस्तारे त्रिकराः दैर्घ्ये कराष्टकमिताः रूपैः विचित्राः च उत्कटपट्टसूत्रपटिकाः अष्टौ शतं लभन्ते तदा दैर्घ्ये सार्द्धकरत्रया हस्तार्द्धविस्तारिणी तादृक् अपरपटी किं लभते इति द्रुतं वद ॥३॥