लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)
Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary
भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें( ७८ ) लीलावती । अथ नवराशिकोदाहरणम्- अब नवराशिका उदाहरण लिखते हैं- पिंडे येऽर्कमितांगुलाः किल चतुर्वर्गांगुला विस्तृतौ पट्टा दीर्घतया चतुर्दशकरास्त्रिंशल्लभन्ते शतम् ॥ एता विस्तृतिपिण्डदैर्घ्यमितयो येषां चतुर्वर्जिताः पट्टास्ते वद मे चतुर्दश सखे मूल्यं लभन्ते कियत् ॥ ४ ॥ अन्वयः-हे सखे ! ये पिण्डे अर्कमितांगुलाः विस्तृतौ चतुर्वर्गांगुलाः दीर्घतया चतुर्दशकराः त्रिंशत् पट्टाः किल शतं लभन्ते तर्हि येषां चतुर्वर्जिताः विस्तृतिपिण्ड- दैर्घ्यमितयः एताः ते पट्टाः चतुर्दश कियत् मूल्यं लभन्ते इति मे वद ॥ ४ ॥ अर्थः-हे मित्र ! जो मोटेपनेमें १२ बारह अंगुल है और विस्तारमें १६ सोलह अंगुल हैं और लंबाईमें १४ चौदह अंगुल है. ऐसे ३० तीस पटेले सौ १०० निष्कके मिलते हैं, तो जिन पटेलोंका चौडापन, मोटापन, लम्बापन चार चार घटाकर पहले ही पटेलोंकी बराबर है. अर्थात् ८ आठ अंगुल मोटे १२ बारह अंगुल चौंडे १० दश अंगुल लम्बे १४ चौदह पटेले कितने मूल्यमें आवेंगे सो कहो ? ॥४॥ १२ | ८ १६ | १२ न्यासः- १४ | १० लब्धं मूल्यं निष्काः १६ २/३ ३० | १४ १०० | ० फैलाव-यहां प्रश्न करनेवालेके कहनेके अनुसार न्यास यह है.ऊपर कहे हुए नियमानुसार यहां हर नहीं है तब भी फलको ही पलट दिया तब न्यास एसा हुआ. बहुत राशियोंका घात किया अर्थात् ८ आठको बारह १२ स गुणा किया तब ९६ छियानवे हुए, इसको १० दशसे गुणा किया तब ९६० नौसौ साठ हुए इसको १४ चौदहसे गुणा किया तब १३३४० तेरह सहस्र तीनसौ चालीस हुआ. इसको सौ १०० से गुणा किया तब १३४४००० तेरह लक्ष चौवालीस हजार बहुत राशिका घात हुआ इसमें थोडी राशिके घात ८०६४० अस्सी हजार छ सौ चालीसका भाग दिया तब १६ सोलह लब्धि हुआ और २/३ यह भिन्नाङ्क रहा. इस प्रकार १६ २/३ निष्कमें आवेंगे. CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri