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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

जाहिरा । क्रयपुस्तकें (ज्योतिषग्रंथाः) । नाम, की. रु. आ. कररेखासंख्यावली-भाषा छन्दबद्ध सुगम सामुद्रिक है. ०-४ कृषिकौमुदी-कृषिकारों तथा जमीदारोंको अवश्य देखना चाहिये. ... ... ०-१२ कृषिविद्या-दूसरा भाग. ... ... ०-५ कृषिविद्या-तीसरा भाग. ... ... ०-८ केरलीयजातक-भाषाछन्दबद्ध (केरलमतसे ग्रहोंका द्वादश स्थानगतभावफल) ... ... ०-५ ज्योतिषकल्पद्रुम-भाषा । श्रीमहाराज शंभूसिंहजी सुठा- लियाधीशकृत। इस ग्रन्थमें चोरी, रोगउत्पत्ति, भोजन मृत्यु, स्वप्न, विवाह, शकुन और नयागमयात्रा तथा वृद्धि इत्यादि सबही प्रकरण आगये हैं.ज्योतिषियोंको अव- श्य संग्रह करना चाहिये. ... ... २-० ज्योतिषकी लावनी-भावफल सुगम बतलाया है. ... ०--१ मानसप्रश्नदीपिका-तात्कालिक मनचिंतित प्रश्नविद्या. ०-४ मेघमालाभङ्गुली-वर्षादिकाविचार भलीप्रकार लिखागया है ०-६ रमलगुलजार-भाषामें-इसमें-भाग्योदय, सुख-दुःख,द्रव्य- प्राप्ति, मातापिताका अज्ञातद्रव्यप्राप्ति, तथा कन्या- पुत्रादिके अनेक उत्तम १०४१ प्रश्न वर्णित हैं. ... ३-० रमलसारप्रश्नावली-भाषा। इस ग्रन्थमें पांसा तीन दफे फेकके अंक जोड प्रश्न कहनेका प्रकार है .... ०-१॥ रत्नपरीक्षा भाषा-रत्नोंकी परीक्षाका यह छोटासा पुस्तक उत्तम है ... ... ... ०-४ रमलभास्कर-प्रश्नग्रन्थ. ... ... ०-८ रमलमार्त्तण्ड- ... ... ... ०-६

जाहिरात। (२) नाम. की. रु. आ. सिद्धिसागर-(राशिमाला) भाषामें-जन्मलग्नका फलनिर्णय तथा बारह राशिके फल भली भांति लिखेहैं ... ०-२ संवत्सरफलदीपिका-भाषामें. ... ... ... ०-३ अयोध्याजातक-भाषाटीकासमेत. ... ०-४ अर्घप्रकाश-भाषाटीकासमेत। इसमें तेजी-मन्दी वस्तु देखनेका विचार भलीभाँति लिखगयाहै. .... ०-५ आनन्दप्रकाश-भाषाटीकासमेतायह ग्रन्थ ज्योतिषियोंको अतीवउपयोगी है। इसमें रोगकी स्थिति, असाध्यरोग किसप्रकार शान्त होगा तथा रोगमुक्ति, स्नानदानादि कितनेही उत्तम विषय लिखेगयेहैं. ... ... ०-३ आर्यभटीय-(ज्योतिषशास्त्र) संस्कृतटीका भाषाटीकासमेत १-० कर्णकुतूहल-सटीक तथा उदाहरणसहित । ब्रह्मपक्षीय गणित ग्रन्थ ... ... ०-१२ करणेन्दुशेखर-इसमें रव्यादि ग्रहोंकी सारणी भलीभाँति दीगईहै। तथा सिद्धान्तोक्त सब विषय संक्षेपसे इसमें आगये हैं. ... ... ०-४ कीर्त्तिपञ्चाङ्ग-संवत् १९८१ का पं० महीधरशर्माकृत । हि- मालयादि देशोंमें यही पंचांग प्रचलितहै. ... ०-६ क्रीडाकौशल्य- भाषाटीकासमेत। इसमें-मुहूर्त,प्रश्न,मन्त्र- यन्त्रादि साधन, पांशे, गँजीफे,ताश, दशावल्लरी ज्ञान- पद, श्मशानद्यूत, साक्षिक्रीडा, विधिक्रीडा, इष्टदेवताद- र्शन शतरंजके अनेकप्रकारके विचित्र खेल और बाल- क्रीडा, रासक्रीडा आदिका वर्णन चित्रोंसमेत. ग्लेज कागज ... .... २-०

( ३ ) जाहिरात। नाम. की. रु. आ. ग्रहलाघवसारणी-यह सारणी बहुतही सरल व उत्तम बनी है इससे तिथि, नक्षत्र, योग, ग्रह आदिकी स्पष्टता तथा ग्रहयुद्ध, शुक्रास्त, सूर्य-चन्द्रग्रहण आदिका ज्ञान बहुतही शीघ्र होता है। जो गणित कार्य्य अधिक समय तक बहुत परिश्रम करनेसे सिद्ध होता था वह इससे अल्प परिश्रमसे थोडे ही कालमें होगा। पञ्चांग बनानेवालोंके लिये बहुतही उपयोगी है. ... १-० बृहज्जातकसटीक-भट्टोत्पलीटीकासमेत जिल्द ... ... २-८ बृहज्जातक-महीधरकृतभाषाटीका अत्युत्तम ... ... २-० पत्रीमार्गदीपिकाऔर-वर्षदीपक (वर्षजन्मपत्र बनानेका ) १-४ मुहूर्त्तचिंतामणि-प्रमिताक्षरा रफ् रु० १ ग्लेज ... ... २-० मुहूर्त्तचिंतामणि-पीयूषधारा टीका ... ... ... ३-८ ताजिकनीलकंठी-सटीक तंत्रत्रयात्मक ... ... .... १-८ ताजिकनीलकंठी-तंत्रत्रयात्मक महीधरकृत भाषाटीका अत्युत्तम टैपकी छपी ... ... ... २-० ज्योतिषसार-भाषाटीकासहित ... ... ... १-१२ मुहूर्त्तचिंतामणिभाषाटीका-महीधरकृत ... ... १-८ मानसागरीपद्धति-( जन्मपत्रबनानेमें परमोपयोगी ) ... ०-१४ बालबोधज्योतिष- ... ... ... ... ... ०-२ ग्रहलाघव-सान्वय सोदाहरण भाषाटीकासमेत स्पष्ट उदाहरण गणिताभ्यासियोंको परमोपयोगी ... १-८ जातकसंग्रह ( फलादेशमें परमोपयोगी ) ... १-० पुस्तक मिलनेका ठिकाना- खेमराज श्रीकृष्णदास, “श्रीवेङ्कटेश्वर” स्टीम प्रेस-बंबई.

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CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri

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