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लीलावती (भास्कराचार्य द्वितीय - प्राचीन भारतीय गणित सटीक)

Lilavati of Bhaskaracharya with Hindi Commentary

भास्कराचार्य द्वितीय (११५० ई.) / पं. रामस्वरूप शर्मा द्वारा

DevanagariSanskritpublished268 पृष्ठ

( ३ ) जाहिरात। नाम. की. रु. आ. ग्रहलाघवसारणी-यह सारणी बहुतही सरल व उत्तम बनी है इससे तिथि, नक्षत्र, योग, ग्रह आदिकी स्पष्टता तथा ग्रहयुद्ध, शुक्रास्त, सूर्य-चन्द्रग्रहण आदिका ज्ञान बहुतही शीघ्र होता है। जो गणित कार्य्य अधिक समय तक बहुत परिश्रम करनेसे सिद्ध होता था वह इससे अल्प परिश्रमसे थोडे ही कालमें होगा। पञ्चांग बनानेवालोंके लिये बहुतही उपयोगी है. ... १-० बृहज्जातकसटीक-भट्टोत्पलीटीकासमेत जिल्द ... ... २-८ बृहज्जातक-महीधरकृतभाषाटीका अत्युत्तम ... ... २-० पत्रीमार्गदीपिकाऔर-वर्षदीपक (वर्षजन्मपत्र बनानेका ) १-४ मुहूर्त्तचिंतामणि-प्रमिताक्षरा रफ् रु० १ ग्लेज ... ... २-० मुहूर्त्तचिंतामणि-पीयूषधारा टीका ... ... ... ३-८ ताजिकनीलकंठी-सटीक तंत्रत्रयात्मक ... ... .... १-८ ताजिकनीलकंठी-तंत्रत्रयात्मक महीधरकृत भाषाटीका अत्युत्तम टैपकी छपी ... ... ... २-० ज्योतिषसार-भाषाटीकासहित ... ... ... १-१२ मुहूर्त्तचिंतामणिभाषाटीका-महीधरकृत ... ... १-८ मानसागरीपद्धति-( जन्मपत्रबनानेमें परमोपयोगी ) ... ०-१४ बालबोधज्योतिष- ... ... ... ... ... ०-२ ग्रहलाघव-सान्वय सोदाहरण भाषाटीकासमेत स्पष्ट उदाहरण गणिताभ्यासियोंको परमोपयोगी ... १-८ जातकसंग्रह ( फलादेशमें परमोपयोगी ) ... १-० पुस्तक मिलनेका ठिकाना- खेमराज श्रीकृष्णदास, “श्रीवेङ्कटेश्वर” स्टीम प्रेस-बंबई.

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CC-0. Late Pt. Manmohan Shastri Collection Jammu. Digitized by eGangotri

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