भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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( ९४ ) माधवनिदान । क्षतक्षीणके असाध्य लक्षण । उरोरुक्शोणितच्छर्दिः कासो वैशेषिकः कफे । क्षीणे सरक्तमूत्रत्वं पार्श्वपृष्ठकटिग्रहः ॥ ३० ॥ क्षतक्षीण रोगीके हृदयमें पीडा होय, रुधिरकी उलटी करे और विशिष्ट कास अर्थात् पूर्व कहे जो दुष्टश्वासादि लक्षण उन्होंसे युक्त और रुधिरयुक्त मूत्रका उतरना, पसवाडे, पीठ और कमर इनमें पीडा होय ॥ साध्यलक्षण । अल्पलिङ्गस्य दीप्ताग्नेः साध्यो बलवतो नवः । परिसंवत्सरो याप्यः सर्वलिङ्गं विवर्जयेत् ॥ ३१ ॥ जिसमें थोडे लक्षण मिलते हों और जिसकी अग्नि दीप्त हो ऐसे पुरुष बलवान् हो तथा रोग नवा हो तो वह साध्य है और रोगको भये एक वर्ष व्यतीत हो गया हो सो याप्य ( साध्यासाध्य ) है और जिसमें सर्वलक्षण मिलते हों सो असाध्य है उसको वैद्य त्याग दे ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थदीपिकामाथुरीभाषाटीकायां राजयक्ष्मरोगः समाप्तः ॥ अथ कासनिदानम् । कारण सम्प्राप्ति और निरुक्ति । धूमोपघाताद्रजसस्तथैव व्यायामरूक्षान्ननिषेवणाच्च । विमार्गगत्वादपि भोजनस्य वेगावरोधात्क्षवथोस्तथैव ॥ १ ॥ प्राणो ह्युदानानुगतः प्रदुष्टः संभिन्नकांस्यस्वरतुल्यघोषः । निरेति वक्रात्सहसा सदोषो मनीषिभिः कास इति प्रदिष्टः ॥२॥ नाक मुखमें धूर धूआँ जानेसे, दंडकसरत, रूक्षान्न इनके नित्य सेवन करनेसे, भोजनके कुपथ्यसे, मलमूत्रके रोकनेसे, उसी प्रकार छिक्का अर्थात् छींक आती हुईके रोकनेसे प्राणवायु अत्यन्त दुष्ट होकर और दुष्ट उदानवायुसे मिलकर कफ- पित्तयुक्त अकस्मात् मुखसे बाहर निकले उसका शब्द फूटे कांस्यपात्रके समान हो उसको विद्वान् लोग कास ( खांसी ) कहते हैं ॥ १ कसति शिरः कण्ठादूर्ध्वं गच्छति वायुरिति कासः ।