भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( ९७ ) साध्यासाध्यविचार । इत्येष क्षयजः कासः क्षीणानां देहनाशनः । साध्यो बलवतां वा स्याद्याप्यस्त्वेवं क्षतोत्थितः ॥ १५ ॥ नवौ कदाचित्सिध्येतामपि पादगुणान्वितौ । स्थविराणां जराकासः सर्वो याप्यः प्रकीर्तितः ॥ १६ ॥ त्रीन्पूर्वान्साधयेत्साध्यान्पथ्यैर्याप्यांस्तु यापयेत् ॥ १७ ॥ इस प्रकार यह क्षयज कास (खांसी) क्षीण पुरुषकी घातक होती है, बलवान पुरुषके असाध्य याप्य (साध्यासाध्य) होती है, क्षतज खांसी भी इसी प्रकारकी होती है। यदि वैद्यादि पादचतुष्टयसंपन्न हों और ये दोनों प्रकारकी खांसी नवीन हों तो कदाचित् साध्य होंय और बूढे पुरुषके जराकास अर्थात् धातुक्षीण होनेसे भई जो खांसी सो सब प्रकारकी याप्य हैं, सो सब इन्द्रियोंके अन्तर्गत जाननी । अब कहते हैं कि, वात, पित्त, कफ ये तीन खांसी साध्य हैं और बाकी तीन याप्य हैं वह पथ्य सेवन करनेसे नाश होती हैं और अवज्ञा करनेसे असाध्य होजाती है ॥ इति श्रीपण्डितदत्तराममाथुरनिर्मितमाधवार्थबोधिनोमाधुरीभाषाटीकायां कासरोगनिदानं समाप्तम् ॥ हिक्का-श्वासनिदानम् । ꕤ—ꕤ—ꕤ विदाहिगुरुविष्टम्भिरूक्षाभिष्यन्दिभोजनैः । शीतपानाञ्जनस्नानरजोधूमातपानिलैः ॥ १ ॥ व्यायामकर्मभाराध्ववेगघातातपर्पणैः । हिक्का श्वासश्च कासश्च नृणां समुपजायते ॥ २ ॥ दाहकारक, भारी, अफराकारक, रूखा, अभिष्यंदी ऐसे भोजन करनेसे शीतल जल पीनेसे, शीतल अन्न खानेसे शीत जल करके स्नान करनेसे, रज और धूएँके मुख नाकमें जानेसे, गरमी व हवामें डोलनेसे, दंड कसरतके करनेसे, भारके उठानेसे, बहुत मार्गके चलनेसे, मलादि वेगके रोकनेसे और उपवासके करनेसे मनु- ष्यके हिक्का (हिचकी) श्वास (दमा) और (कास) खांसी ये रोग उत्पन्न होते हैं ॥ १ पूयाभमरुणं श्याम हरितं पीतनीलकम् । निष्ठीवेच्छ्वासकासार्तो न जीवति हतस्वरः ॥ कासश्वासक्षयच्छर्दिरस्वरभेदादयो गदाः । मंवत्युपेष्ययाऽसाध्यास्तस्मात्तांस्त्वरया जयेत् ॥ इति॥ ५