माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ
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( १४ ) माधवनिदानकी-
| विषय. | पृष्ठांक. | विषय. | पृष्ठांक. |
|---|---|---|---|
| दोषभेदसे कालमर्यादाके लक्षण | ३१५ | नेत्रकी सन्धिके रोग । | |
| नेत्ररोगके सामान्य लक्षण | ,, | पूयालसके ल०, उपनाहके लक्षण | ३२९ |
| निरामके लक्षण, शोथसहित नेत्रपाकके लक्षण | ३१६ | स्राव अथवा नेत्रनाडीके लक्षण | ,, |
| हताधिमन्थके लक्षण | ,, | पर्वणी व अलजीके ल०, कृमिग्रंथिके लक्षण | ३३० |
| वातपर्ययके लक्षण, शुष्काक्षिपाकके लक्षण | ३१७ | वर्त्मरोग (मर्मस्थानके) रोग । | |
| अन्यतोवातके लक्षण, अम्लाध्युषितके लक्षण | ,, | उत्संगपिडिकाके लक्षण | ३३० |
| शिरोत्पातके लक्षण, शिराहर्षके लक्षण | ३१८ | कुंभिकाके लक्षण | ३३१ |
| नेत्रोंके काले रंगमें रोग । | पोथकीके लक्षण, वर्त्मशर्कराके लक्षण | ,, | |
| सव्रण शुक्र लक्षण, सव्रण शुक्रके साध्यासाध्य ल० | ३१८ | अर्शोवर्त्मके लक्षण, शुष्कार्र्शके लक्षण | ,, |
| अव्रण शुक्रके लक्षण | ३१९ | अञ्जनके लक्षण | ,, |
| अव्रण अवस्था विशेषकरके साध्य लक्षण | ,, | बहलवर्त्मके लक्षण | ३३२ |
| सव्रण अवस्थाभेदकरके असाध्य लक्षण | ,, | वर्त्मबन्धके लक्षण | ,, |
| दूसरे असाध्य लक्षण | ,, | क्लिष्टवर्त्मके लक्षण, वर्त्मकद्दमके लक्षण | ,, |
| अक्षिपाकात्ययके लक्षण, अजकाजातके लक्षण | ३२० | श्याववर्त्मके लक्षण | ,, |
| दृष्टिके रोग । | प्रक्लिन्नवर्त्मके लक्षण | ३३३ | |
| पहले पटलमें दोष जानेसे उसके लक्षण | ३२० | अक्लिन्नवर्त्मके लक्षण, वातहतवर्त्मके लक्षण | ,, |
| दृष्टिका प्रमाण सुश्रुत मतसे | ,, | अर्बुदके लक्षण, निमेषके लक्षण | ,, |
| प्रसंगवशसे पटल (मण्डल) का भेद | ,, | शोणितार्शके लक्षण | ३३४ |
| द्वितीयपटलस्थितदोषके लक्षण | ३२१ | लगणके लक्षण, बिसवर्त्मके लक्षण | ,, |
| तृतीयपटलगतदोषके लक्षण | ,, | कुम्भनके लक्षण | ,, |
| चतुर्थपटलगततिमिरके लक्षण | ३२२ | पक्ष्मकोपके लक्षण | ३३५ |
| तृतीयपटलाश्रितकाचदोषकी दूसरी संज्ञा | ,, | पक्ष्मशातके लक्षण, नेत्ररोगोंकी संख्या | ,, |
| दोषविशेष करके रूपका दीखना | ३२३ | शिरोरोगनिदानम् । | |
| पित्तसे दूसरे परिम्लायी संज्ञक तिमिर, लक्षण | ,, | वातजके लक्षण, पैत्तिकके लक्षण | ३३६ |
| रोगभेदसे लिंगनाशको षड्विधत्व | ३२४ | श्लैष्मिकके लक्षण, सान्निपातिकके लक्षण | ,, |
| वातिकरोगके विशेष लक्षण | ,, | रक्तजके लक्षण | ३३७ |
| दृष्टिमण्डलगत रोगके लक्षण | ,, | क्षयजके लक्षण, कृमिजके लक्षण | ,, |
| सर्वदृष्टिरोगकी संख्या, पित्तविदग्धके लक्षण | ३२५ | सूर्यावर्त्तके लक्षण, अनंतवातके लक्षण | ,, |
| दिवांधके लक्षण, कफविदग्धदृष्टिके लक्षण | ,, | अर्धावभेद (आधीसीसी) के लक्षण | ३३८ |
| नक्तान्ध (रतौंधी) के लक्षण | ,, | शंखकके लक्षण | ,, |
| धूमदर्शीके लक्षण, ह्रस्वदृष्टिके लक्षण | ३२६ | प्रदररोगनिदानम् । | |
| नकुलान्ध्यके लक्षण, गम्भीरदृष्टिके लक्षण | ,, | प्रदररोगके सामान्य रूप-उपद्रवके लक्षण | ३३९ |
| आगन्तुकलिंगनाशके लक्षण | ,, | श्लैष्मिकके लक्षण | ३४० |
| आनिमित्तके लक्षण | ३२७ | पैत्तिकके लक्षण | ,, |
| अर्र्मरोग (५) प्रकारका है | ,, | वातिकके लक्षण, त्रिदोषजके लक्षण | ,, |
| शुक्तिरोगके लक्षण, अर्जुनके लक्षण | ३२८ | विशुद्धार्तवके लक्षण | ,, |
| पिष्टकके लक्षण, जालके लक्षण | ,, | योनिव्यापत्तिनिदानम् । | |
| शिराजपिटिकाके लक्षण, बलासके लक्षण | ३२९ | योनिके बीस रोगोंके लक्षण | ३४१ |
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