भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 174

( १५६ ) माधवनिदान । मिथ्याहारविहारिणाम् ॥ ३ ॥ स्थूलानां सुखिनां चाथ वात- रक्तं प्रकुप्यति ॥ ४ ॥ नोन, खटाई, कडवी, खारी, चिकना, गरम, कच्चा ऐसे भोजनसे, सडे और सूखे ऐसे जलसंचारी जीवोंके और जलके समीप रहनेवाले जीवोंके मांससे, पिण्याक ( खल ), मूली, कुलथी, उडद, निष्पाव ( सेम ), शाक ( तरकारी ), पलल ( मांस ), ईख, दही, कांजी, सौवीर मद्य, सूक्त ( सिरका आदि ) छाछ, दारू, आसव ( मद्य विशेष ), विरुद्ध जैसे दूध, मछली, अध्यशन ( भोजनके ऊपर भोजन ), क्रोध, दिनमें निद्रा, रातमें जागना इन कारणोंसे विशेष करके सुकुमार पुरुषोंके और मिथ्या आहार विहार करनेवाले पुरुषोंके और जो मोटा होय तथा सुखी होय ऐसे मनुष्योंके वातरक्त रोग होता है ॥ वातरक्तकी सम्प्राप्ति । हस्त्यश्वोष्ट्रैर्गच्छतश्चाश्वतश्च विदाह्यन्नं सविदाहाशनस्य । कृत्स्नं रक्तं विदहत्याशु तच्च त्रस्तं दुष्टं पादयोश्रीयते तु । तत्संपृक्तं वायुना दूषितेन तत्प्राबल्यादुच्यते वातरक्तम्॥५॥ हाथी, घोडा, ऊंट इनपर बैठकर जानेसे ( यह वायुके बढनेका और विशेष करके रुधिरके उतरनेका कारण है ), विदाहकारी अन्नके खानेवाले पुरुषके इसीसे दग्ध- रुधिरकी वृद्धि होती है, गरमागरम अन्नके खानेवाले ऐसे पुरुषके सब शरीरके रुधिर दुष्ट होकर पैरोंमें इकठा होय और वह दुष्ट वायुसे दूषित होकर मिलै, इस रोगमें वायु प्रबल है, इसीसे इस रोगको वातरक्त कहते हैं ॥ वातरक्तका पूर्वरूप । स्वेदोऽत्यर्थं न वा कार्ण्य स्पर्शाज्ञत्वं क्षतेऽतिरुक् । सन्धि- शैथिल्यमालस्यं सदनं पिटिकोद्गमः ॥ ६ ॥ जानुजङ्घोरु- कट्यंसहस्तपादाङ्गसन्धिषु । निस्तोदः स्फुरणं भेदो गुरुत्वं सुप्तिरेव च ॥ ७ ॥ कण्डूः सन्धिषु रुग्भूत्वा भूत्वा नश्यति चासकृत् । वैवर्ण्यं मण्डलोत्पत्तिर्वातासृक्पूर्वलक्षणम् ॥ ८ ॥ १ रुजस्तीव्राः ससन्तापाः इत्यादिना रक्तगतस्य वातस्य लक्षणं वातव्याधावेवोक्तं तत्तश्च वातरक्तविधानं पुनरुक्तं हि स्यात्, नैवं वातरक्तं दुष्टेन वातेन रक्तेन च विशिष्टसम्प्राप्तिकं यद्विकारान्तरमेवे । रक्तगतवाते तु वात एव दुष्टो रक्तमदुष्टमेव गच्छतीति भेदः । CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA