माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( १६७ ) वातिक परिणामशूलके लक्षण । आध्मानाटोपविण्मूत्रनिबन्धारतिवेपनैः । स्निग्धोष्णोपशमप्रायं वातिकं तद्वदेद्भिषक् ॥ १७ ॥ पेटका फूलना तथा पेटमें गुडगुडशब्द, मलमूत्रका अवरोध, अरति ( मनका न लगना ), कम्प ये लक्षण हों और चिकना, गरम पदार्थसे शांत होय ऐसे शूलको वातिक कहते हैं ॥ पैत्तिक परिणामशूलके लक्षण । तृष्णादाहारतिस्वेदकट्वम्ललवणोत्तरम् । शूलं शीतशमप्रायं पैत्तिकं लक्षयेद् बुधः ॥ १८ ॥ प्यास, दाह, चित्तका न लगना, पसीना ये लक्षण होयँ । तीखा, खट्टा, नोनका ऐसे पदार्थ खानेसे बढनेवाला और शीतल पदार्थके सेवनसे शांत होय ऐसा शूल पित्तका जानना ॥ श्लैष्मिक परिणामशूलके लक्षण । छर्दिहल्लाससंमोहस्वल्परुग्दीर्घसन्तति । कटुतिक्तोपशान्तं च तच्च ज्ञेयं कफात्मकम् ॥ १९ ॥ वमन, अफरा और संमोह ( इंद्रिय और मनको मोह ) ये लक्षण जिसमें बहुत होयँ, पीडा थोडी होय, शूल बहुत दिन रहे, कडुवे और तीखे पदार्थसे शांत होय उस शूलको कफात्मक जानना ॥ द्विदोषज और त्रिदोषजके लक्षण । संसृष्टलक्षणं यच्च द्विदोषं परिकल्पयेत् । त्रिदोषजमसाध्यं तु क्षीणमांसबलानलम् ॥ २० ॥ जिसमें दो दोषोंके लक्षण मिले हों उसको द्वंद्वज कहते हैं और तीन दोषोंके लक्षणोंसे त्रिदोषज जानना । मांस बल और अग्नि ये जिसके क्षीण होगये हों ऐसा शूलरोग असाध्य जानना ॥ अन्नके उपद्रवसे प्रगट शूलके लक्षण । जीर्णे जीर्यत्यजीर्णे वा यच्छूलमुपजायते । पथ्यापथ्यप्रयोगेन भोजनाभोजनेन च ॥ न शमं याति नियमात्सोऽन्नद्रव उदाहृतः ॥ २१ ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA