भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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भाषाटीकासमेत । ( १९३ ) प्रमेहके असाध्य लक्षण । यथोक्तोपद्रवाविष्टमतिप्रस्रुतमेव च । पिडिकापीडितं गाढं प्रमेहो हन्ति मानवम् ॥ २१ ॥ ऊपर कहि आये अविपाकादि उपद्रव वे सब होंय, जिसके मूत्रका स्राव बहुत हुआ होय, शराविका आदि जो पिडिका आगे कहेंगे वे होंयँ, रोगका अंगमें प्रवेश होय ऐसे लक्षण होनेसे वह प्रमेह मनुष्यको मार डाले ॥ दूसरे असाध्य लक्षण । जातः प्रमेही मधुमेहिनो वा न साध्यरोगः स हि बीजदोषात् । मधुमेही पुरुषसे उत्पन्न भया जो प्रमेहवान् पुरुषका रोग वह बीजदोषके कार- णसे साध्य नहीं होय । इस जगह मधुमेहशब्दसे साधारण प्रमेह जानना । इस जगह भी मधुकोशटीकावालेने मधुमेहशब्दपर बहुतसा शास्त्रार्थ लिखा है ॥ कुलपरंपरागत अन्यविकारोंका असाध्यत्व कहते हैं- ये चापिकेचित्कुलजा विकाराभवन्ति तांस्तान्प्रवदन्त्यसाध्यान्॥२२ जो कोई कुष्ठादिक कुलपरंपरागत विकार हैं वे सब असाध्य हैं ॥ सर्व प्रमेहकी उपेक्षा करनेसे मधुमेह होता है, उसको कहते हैं- सर्व एव प्रमेहास्तु कालेनाप्रतिकारिणः । मधुमेहत्वमायान्ति तदाऽसाध्या भवन्ति हि ॥ २३ ॥ सब प्रमेह औषधके विना काल करके मधुमेहत्वको प्राप्त होते हैं, तब वे असाध्य हो जाते हैं । धातुक्षय और आवरण इनसे कुपित भयी वायु मधुमेहका हेतु होती है॥ मधुमेहे मधुसमं जायते स किल द्विधा । क्रुद्धे धातुक्षयाद्वायौ दोषावृतपथेऽथवा ॥ २४ ॥ मधुमेहमें मूत्र मधु ( शहद ) के समान होय है, सो दो प्रकारका है, एक जो धातुक्षय होनेसे वायु कुपित होकर होय और दूसरा दोषों करके पवनका मार्ग आवृत ( ढकने ) करके होय है ॥ आवरणके लक्षण । आवृत्तो दोषलिङ्गानि सोऽनिमित्तं प्रदर्शयन् । क्षीणः क्षणात्पुनः पूर्णो भजते कृच्छ्रसाध्यताम् ॥ २५ ॥ आवृत वायुसे प्रगट मधुमेह जिस पित्तादि दोष करके आच्छादित होय उसके लक्षण अकस्मात् दीखें, क्षणभरमें क्षीण होय, क्षणमें पूर्ण होय वह कष्टसाध्य जानना॥ ८ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA