भारतकोश
माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)

Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation

माधवकर द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished404 पृष्ठ

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पृष्ठ 267

भाषाटीकासमेत । ( २४९ ) ग्रथितके लक्षण । शूकैर्यत्पूरितं शश्वद्ग्रथितं नाम तत्कफात् ॥ ३ ॥ निरन्तर शूकलेप करनेसे लिंगेन्द्रियके ऊपर गांठ पैदा होय, उसे ग्रन्थित कहते हैं ॥ कुंभिकाके लक्षण । कुंभिका रक्तपित्तोत्था जांबवास्थिनिभाऽशुभा । रक्तपित्तसे जामुनकी गुठलीके समान, काले रंगकी पिडिका होय, उसको कुंभिका ऐसे कहते हैं ॥ अलजीके लक्षण । तुल्यजां त्वलजीं विद्याद्यथाप्रोक्तं विचक्षणैः ॥ ४ ॥ यह पिडिका प्रमेहपिडिकामें जो अलजी नाम पिडिका कह आये हैं उनके समान लाल काले फोडोंसे व्याप्त होय तथा उसके लक्षण पूर्वोक्त पिडिकाकेसे होय हैं ॥ मृदितके लक्षण । मृदितं पीडितं यत्तु संरब्धं वातकोपतः । शूकपीडा होनेके अनन्तर लिंगको हाथोंसे मीडनेसे अथवा दाबनेसे वायुके कोपसे लिंग सूज जाय ॥ संमूढपिडिकाके लक्षण । पाणिभ्यां भृशसंमूढे संमूढपिडिका भवेत् ॥ ५ ॥ लेप करनेके अनन्तर जब लिंगमें खुजली चलै तब उसको दोनों हाथोंसे खूब खुजावे तब एक मूढ ( विना मुखकी ) पिडिका होय उसको संमूढपिडिका कहते हैं ॥ अवमंथके लक्षण । दीर्घा बह्व्यश्च पिडिका दीर्यन्ते मध्यतस्तु याः । सोऽवमंथः कफासृग्भ्यां वेदनारोमहर्षकृत् ॥ ६ ॥ कफरक्तसे लम्बी और अनेक तथा बीच बीचमें फूटी हुई ऐसी जो पिडिका लिंगमें होयँ, उसके होनेसे रोमाञ्च और पीडा होय, इस रोगको अवमंथ ऐसे कहते हैं ॥ पुष्करिकाके लक्षण । पित्तशोणितसंभूता पिडिका पिडिकाचिता । पद्मकर्णिकसंस्थाना ज्ञेया पुष्करिका च सा ॥ ७ ॥ पित्तरक्तसे उत्पन्न हुई पिडिका उसके चारों तरफ अनेक छोटी २ फुन्सियां होय और वह कमलके भीतरकी केसरके समान सब फुन्सी होयँ उसको पुष्क- रिका ऐसे कहते हैं ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA