माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
पृष्ठ 277, कुल 404 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । (२५९) किलासनिदान । कुष्ठैकसम्भवं श्वित्रं किलासं चारुणं भवेत् । निर्दिष्टमपरिस्त्रावि त्रिधातूद्भवसंश्रयम् ॥ ३८ ॥ कुष्ठ होनेके जो कारण (विरुद्धभोजन पापकमीदि) कहे हैं उन्हीं कारणोंसे श्वित्र (सफेद कोढ) और किलास (लाल कोढ) ये होते हैं इनमें स्त्राव नहीं होय तथा ये तीन धातुओंका आश्रय करके रहते हैं अर्थात् तीन दोष और रुधिर मांस तथा मेद इनका आश्रय करके रहते हैं ॥ वातादिभेदसे उनके लक्षण । वाताद्रूक्षारुणं पित्तात्ताम्रं कमलपत्रवत् । सदाहं रोमविध्वंसि कफाच्छ्वेतं घनं गुरु ॥ ३९ ॥ सकण्डूरं क्रमाद्रक्तमांसमेदस्सु चादिशेत् । वर्णेनैवेहगुभयं कृच्छ्रं तच्चोत्तरोत्तरम् ॥ ४० ॥ बादीसे रूक्ष और लाल होय, पित्तसे ताम्बेके वर्ण समान तथा कमलपत्रके समान लाल आकृति होय और उसमें दाह होय, उसके ऊपरके बाल गिरपडे, कफके योगसे वह कोढ सफेद, गाढा और भारी होय और उसमें खुजली चले, रुधिर, मांस और मेदमें क्रमसे लाल ताम्र श्वेतवर्णसे किलास जानना अर्थात् दोष रक्ताश्रित होनेसे लाल, मांसाश्रित होनेसे तामेके रंग और मेदाश्रित होनेसे सफेद किलास होय है और वर्णसेही दोषसे उत्पन्न तथा व्रणसे उत्पन्न हुआ किलास, श्वित्र उत्तरो- त्तर (रसगतसे मांसगत और मांसगतसे मेदोगत) कृच्छ्रसाध्य हैं ॥ श्वित्रके साध्यासाध्य लक्षण । अशुक्लरोम बहलमसंश्लिष्टमथो नवम् । अनग्निदग्धजं साध्यं श्वित्रं वर्ज्यमतोऽन्यथा ॥ ४१ ॥ जिस श्वित्र कोढके ऊपरके बाल काले हों तथा जो पतले होकर आपसमें मिले नहीं, तथा नवीन श्वित्र हो, अग्निदग्ध न हो, वह श्वित्रकोढ साध्य जानना, इससे विपरीत असाध्य है ॥ १ कुष्ठेन सह एकं समानं विरुद्धाशनपापकर्मादिसम्भवो निदानं यस्य तत् कुष्ठैकसम्भ- वम् । २ त्रिधातूद्भवसंश्रयमिति-त्रिधातवस्त्रयो दोषास्तथा रक्तमांसमेदांसि उद्भवोय संश्रयोऽधिष्ठानं यस्य तत्तथा ॥