माधव निदान (मधुकोश व्याख्या व हिन्दी अनुवाद सहित)
Madhava Nidana with Madhukosha & Hindi Translation
माधवकर द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंभाषाटीकासमेत । ( २६३ ) अम्लपित्त अधोगत होनेसे प्यास, दाह, मोह, ( इन्द्रिय मोह ) मूर्च्छा, भ्रम, ( मनो ) मोह, सूखी रह, मन्दाग्नि, कोठ, कानमें पसीना, देहमें पीलापन ये लक्षण होकर गुदाके द्वारा काले लाल दुर्गन्धयुक्त अनेक वर्णके पित्त गिरें ॥ ऊर्ध्वगत अम्लपित्तके लक्षण । वान्तं हरित्पीतकनीलकृष्णमारक्तरक्ताभमतीव चाम्लम् । मांसोदकाभं त्वतिपिच्छलाच्छश्लेष्मानुयातं विविधं रसेन ॥ ४ ॥ भुक्ते विदग्धे त्वथवाप्यभुक्ते करोति तिक्ताम्लवमिं कदाचित् उद्गारमेवंविधमेव कण्ठे हृत्कुक्षिदाहं शिरसो रुजं च ॥ ५ ॥ ऊर्ध्वगत पित्तसे हरे, पीले, नीले, काले, थोडे लाल अथवा रक्तके सदृश अत्यन्त खट्टा, मांस धोयेहुए जलके समान, अत्यन्त रेसदार, स्वच्छ, कफमिश्रित, खारी, कसेला आदि संयुक्त ऐसे पित्त गिरे, कभी कभी भोजन करे अन्न विदग्धावस्थाको प्राप्त होकर अथवा भोजन करनेके पहिले कडुवी खट्टी ऐसे वमन होय तथा ऐसीही डकारें आवें, कण्ठ, कूख, हृदय इनमें दाह होय, माथा दूखे ॥ कफपित्तजन्य अम्लपित्तके लक्षण । करचरणदाहमौष्ण्यं महतीमरुचिं ज्वरं च कफपित्तम् । जनयति कण्डूमण्डलपिडिकाशतनिचितगात्ररोगचयम् ॥ ६ ॥ हाथ पैरोंमें दाह, गरमी, अन्नमें अरुचि, ज्वर, कण्डू ( खुजली ), रुधिरके बिगडनेसे देहमें मण्डल हो, सैकड़ों पिटिका, अविपाकादि अनेक उपद्रव ये लक्षण कफपित्तसे होते हैं ॥ साध्यासाध्य विचार । रोगोऽयमम्लपित्ताख्यो यत्नात्संसाध्यते नवः । चिरोत्थितो भवेद्याप्यः कृच्छ्रसाध्यः स कस्यचित् ॥ ७ ॥ यह अम्लपित्तरोग नया होय तो यत्न करनेसे साध्य होय और बहुत दिनका होय तो याप्य जानना और जो अपथ्यसेवन करनेवाले पुरुष हैं उनके यह अम्ल- पित्तरोग कृच्छ्रसाध्य होय है ॥ अम्लपित्तमें केवल वायुका और वातकफका संसर्ग होय सो कहते हैं- सानिलं सानिलकफं सकफं तच्च लक्षयेत् । दोषलिङ्गेन मतिमान्भिषङ्मोहकरं हि तत् ॥ ८ ॥ CC-0. JK Sanskrit Academy, Jammmu. Digitized by S3 Foundation USA